Health Tips: लोहे के बर्तन में बना खाना खाने से शरीर में आयरन की कमी नहीं होगी।

स्वास्थ्य सुझावगलत खान-पान और खराब लाइफस्टाइल के कारण शरीर में पोषक तत्वों और आयरन की कमी होना आम बात है। कंबोडिया में आयरन फिश ट्रिक से बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित हुए हैं।

स्वास्थ्य सुझावगलत खान-पान और खराब लाइफस्टाइल के कारण शरीर में पोषक तत्वों और आयरन की कमी होना आम बात है। कंबोडिया में आयरन फिश ट्रिक से बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित हुए हैं। वहां लोग खाना बनाते समय मछली के आकार में लोहे के टुकड़े डालते हैं। नौ महीने तक रोजाना इस तरह से तैयार किया गया भोजन वहां के लोगों में 50 प्रतिशत आयरन की कमी को दूर करने के परिणाम दिखा रहा है। लोहे की कढाई जैसे बर्तनों में खाना बनाने की हमारी परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। हम बता रहे हैं लोहे के बर्तनों के फायदों के बारे में-

इसलिए बेहतर है: लोहे की कड़ाही में खाना पकाने से उसमें मौजूद आयरन की मात्रा भोजन में मिल जाती है। सब्जी को अगर तवे में कुछ देर के लिए छोड़ दिया जाए तो उसका रंग हल्का काला हो जाता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद होता है। लगभग सभी हरी सब्जियां आयरन से भरपूर होती हैं। लोहे की कड़ाही में बनने पर यह लोहे की मात्रा को बढ़ाकर और भी फायदेमंद हो जाता है।

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बर्तन में जंग लगने की स्थिति में:
जंग की हल्की परत दिखाई देने पर बर्तन को हल्के से पोंछ कर इस्तेमाल करना चाहिए। इससे जंग के हल्के हिस्से भोजन के साथ शरीर में पहुंच जाते हैं, जो खून को बढ़ाने में सहायक होते हैं। लेकिन अगर मोटी परत है तो बर्तन को अच्छी तरह से धोने के बाद ही इसका इस्तेमाल करें।

दूध को ज्यादा देर तक न रखें :
दूध को लोहे के बर्तन में उबाला जा सकता है, लेकिन इसे ज्यादा देर तक बर्तन में नहीं रखना चाहिए। दूध प्रोटीन से भरपूर होता है। इसमें लोहा नहीं होता है, इसलिए यह बर्तन से लोहे को अवशोषित नहीं कर सकता है। इससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है।

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सामान्य हालत :
शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा उम्र के साथ बदलती रहती है। आम तौर पर इसकी मात्रा पुरुषों में 14-17 ग्राम प्रति डीएल और महिलाओं में 12-16 ग्राम प्रति डीएल के बीच होनी चाहिए। इससे ऊपर के स्तर पर ज्यादा आयरन न लें वरना ब्लड कैंसर होने का खतरा हो सकता है।

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