पटरी पर लाैटने लगी अर्थव्यवस्था:एमआईए में 95 फीसदी उद्याेगाें में फिर उत्पादन शुरू, 25 हजार से अधिक लाेग काम पर वापस लौटे

पटरी पर लाैटने लगी अर्थव्यवस्था:एमआईए में 95 फीसदी उद्याेगाें में फिर उत्पादन शुरू, 25 हजार से अधिक लाेग काम पर वापस लौटे

लॉकडाउन से पहले एमआईए में 35 से 40 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ था

लाॅकडाउन के दाैरान भी कुछ इकाइयाें में हुआ उत्पादन, अब फिर से मजदूरों के चेहरे पर आई खिलखिलाहट

हैवल्स इंडिया लिमिटेड, अशोक लीलेंड, रोका बाथरूम प्राॅडक्ट लि., मैट्स इंडिया लि., लॉ‌र्ड्स क्लोरो एल्कलीज, कार्ल्स बर्ग आदि में कार्यरत हैं हजारों कर्मचारी

देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या भले ही बढ़ रही हो, लेकिन उद्योगों में शुरू हुए कामकाज से देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने लगी हैं। लॉकडाउन के दौरान एमआईए में बंद हुए उद्योगों में से 95 प्रतिशत इकाइयाें में फिर काम शुरू हो गया है। एमआईए में मौजूदा समय में करीब 550 छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां चालू हो गई हैं। अशोक लीलैंड व रोका बाथरूम प्राॅडक्ट लि. को छोड़ दें तो ज्यादातर बड़ी इंडस्ट्रीज तीनों शिफ्ट में चल रही हैं।

महामारी के डर से जिन प्रवासी कामगारों ने अपने गांव-घर का रुख कर लिया था, वे उद्योग-धंधों में कामकाज की शुरुआत के साथ ही लौटने लगे हैं। करीब 80 प्रतिशत श्रमिक लौट आए हैं। एमआईए में 25 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल गया है। उद्योगपतियों एवं फैक्ट्री प्रबंधकों का मानना है कि लॉकडाउन से पहले जिस हिसाब से इंडस्ट्रीज चल रही थी, उतना काम तो नहीं चल रहा, लेकिन फिर भी हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं।

उद्योग पूरी तरह पटरी पर आने में अभी एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है। एमआईए की सभी फैक्ट्रियों का औसत लगाया जाए तो अभी 60 से 65 प्रतिशत क्षमता से काम चल रहा है। लॉकडाउन से पहले एमआईए में 35 से 40 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ था। अब करीब 25 हजार श्रमिक व स्टाफ काम कर रहा है। ज्यादातर मजदूर काम पर लौट आए हैं। बाकी श्रमिकाें के दिवाली के बाद आने की संभावना है। सबसे बड़ी परेशानी उन इकाइयों को आ रही है,

जिनके प्राॅडक्ट की बाजार में अभी डिमांड कम है। इनमें चिप्स, मार्बल व सेनेटरी आइटम हैं। इसके अलावा छोटी उद्योगों में काम कम चल रहा है। पिछले कुछ दिनाें से वापस तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के कारण अस्पतालों में ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ गई हैै। ऐसे में इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज काे ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। ऑक्सीजन के दाम भी बढ़ गए हैं। कुछ दिन पहले तक ऑक्सीजन का सिलेंडर 200 रुपए में मिलता था, अब 800 से 1000 रुपए में खरीदना पड़ रहा है।

एमआईए में इंजीनियरिंग की करीब 80 इकाइयां हैं, जिनमें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। डोलोमाइट पाउडर, फूड प्राॅडक्ट, केमिकल, एग्रीकल्चर, शराब, बीयर, फार्मास्युटिकल का उत्पादन वाली इकाइयां चल रही हैं।
एमआईए में ये हैं बड़ी इकाइयां : हैवल्स इंडिया लिमिटेड, अशोक लीलेंड, रोका बाथरूम प्राॅडक्ट लि., मैट्स इंडिया लि., लॉ‌र्ड्स क्लोरो एल्कलीज, कार्ल्स बर्ग, यूनाइटेड स्प्रिट, आरएसपीएल लि., डाबर इंडिया लि., अडानी बिल्मर लि., महेश एडिबल लि., जैन इरिगेशन, सिनर्जी स्टील, एसएसबी इंजीनियरिंग आदि बड़ी कंपनियां है। इनमें एक-दो कंपनी को छोड़कर ज्यादातर में तीनों शिफ्ट में काम चल रहा है।

लॉकडाउन में श्रमिकों को इंसेटिव देकर यूनिट को चालू रखा
अडानी बिल्मर लि. में लॉकडाउन के दाैरान उत्पादन चालू रहा। फाॅरच्यून ब्रांड कच्ची घाणी सरसों का तेल बनाने वाली इस कंपनी ने श्रमिकों को पलायन से रोकने के लिए इंसेंटिव की स्कीम चलाई। इसमें कंपनी में काम करने वाले प्रत्येक श्रमिक को वेतन के अलावा प्रतिदिन 160 रुपए का इंसेंटिव दिया गया। 22 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के साथ कंपनी बंद कर दी। इस बीच भारत सरकार ने जरूरी सेवाओं की फैक्ट्रियों को चालू करने के आदेश दे दिए।

कंपनी के यूनिट हैड अनुराग त्रिपाठी का कहना है कि 26 मार्च को यूनिट में प्राॅडक्शन चालू कर दिया। कंपनी प्रबंधन श्रमिकों का पलायन रोकने के लिए इंसेंटिव स्कीम लेकर आया। इसमें श्रमिकों को वेतन के अलावा प्रतिदिन 160 रुपए इंसेंटिव के रूम में 31 मई तक दिए गए। इस कारण श्रमिक नहीं गए। कंपनी में अभी प्रतिदिन 300 टन तेल का उत्पादन हो रहा है। यह तेल पूरे भारत में सप्लाई हो रहा है।
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए मुफ्त दे रहे हैं कैल्शियम हाइपो क्लोराइड : लॉर्ड्स क्लोरो एल्कली लि. की ओर से कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं सरपंचों को निशुल्क रूप से कैल्शियम हाइपो क्लोराइड उपलब्ध कराया जा रहा है। काेराेना संक्रमित एरिया में इसका छिड़काव किया जाता है।

हैवल्स इंडिया में तीनों शिफ्ट में 1800 से अधिक श्रमिक काम कर रहे हैं। एमआईए की छोटी इकाइयों को छोड़ दिया जाए ताे ज्यादातर बड़ी इकाइयों में काम चल रहा है। हैवल्स में तो ज्यादातर श्रमिक लोकल हैं। 95 प्रतिशत क्षमता से इकाई काम कर रही है। जिन फैक्ट्रियों में बाहर के श्रमिक हैं, वे भी धीरे-धीरे आने लगे हैं। बिहार में अभी कोराेना फैला हुआ है, इस कारण कुछ श्रमिक आने में अभी डर रहे हैं। एमआईए में फैक्ट्रियां शुरू होने से करीब 25 हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
आरके काजला, अध्यक्ष, अलवर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज
लॉकडाउन से पहले हमारी इकाई में जितनी लेबर काम करती थी, उतनी काम कर रही है। हालांकि हमारी यूनिट अभी 70 प्रतिशत क्षमता से ही प्राॅडक्शन कर रही हैं। बाजार में डिमांड कम होने से प्राइज पर असर पड़ा है। पहले हम 36 हजार टन में माल बेचते थे, अब 18 से 20 हजार रुपए टन में बेचना पड़ रहा है। यूनिट में कास्टिक सोडा, एचसीएल व क्लोरीन गैस का उत्पादन होता है। एमआईए में केमिकल और सीपीडब्ल्यू के करीब 30 प्लांट हैं। कुछ को छोड़कर सभी में प्राॅडक्शन हो रहा है।
केएन पुन्नी, जनरल मैनेजर, लॉ‌र्ड्स क्लोरो एल्कली लि.
बिहार, यूपी सहित अन्य प्रदेशों के 80 प्रतिशत श्रमिक वापस आ गए हैं। लॉकडाउन से पहले जो फैक्ट्रियां चालू थी, वो लगभग शुरू हो गई हैं। किसी में कम तो किसी में ज्यादा प्राॅडक्शन हो रहा है। उद्योग चलाने में सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली। सरकार की ओर से आर्थिक पैकेज देना तो दूर लॉकडाउन के दौरान बंद रही फैक्ट्रियों के बिजली के स्थाई शुल्क तक माफ नहीं किए गए। सरकार को उद्योपतियों की मदद करनी चाहिए।
मोहन निहलानी, अध्यक्ष, मत्स्य उद्योग संघ