नवरात्रि में क्या करें, क्या न करें, आइए जाने |

नवरात्रि में क्या करें, क्या न करें, आइए जाने |

नवरात्रि के दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर मां की आराधना करनी चाहिए। इससे आप पूरी तरह से अपनी मन पूजा में लगा पाते हैं। जिससे आपको पूजा का पूर्ण फल मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करने से मां प्रसन्न होती हैं। नवरात्रि में देर तक नहीं सोना चाहिए।

नवरात्रि में मां को प्रतिदिन उनकी पसंद का भोग और पुष्प अर्पित करने चाहिए। विधि-विधान से पूजन करने के साथ हो सके तो मां दुर्गा के मंत्रो का जाप करना चाहिए।

इन नौ दिनों में सप्तशती, दुर्गा चालीसा आदि का पाठ करना चाहिए और माता की भक्ति में दिन व्यतीत करना चाहिए। ध्यान रहे की सप्तशती का पाठ एकाग्रता के साथ करना चाहिए। पाठ करते समय बीच में उठना नहीं चाहिए न ही किसी से बात करनी चाहिए। अगर आपको किसी कार्य से उठना है, तो प्रणाम करके ही पाठ को छोड़ कर उठे और अगले दिन या कुछ समय बाद पाठ को पूरा करें।

इस समय मां की चौकी के पास ही बिस्तर लगाकर भूमि पर शयन करना चाहिए। व्रती को कुर्सी या फिर पंलग पर नहीं बैठना चाहिए। नवरात्रि में दिन के समय सोना वर्जित माना गया है।

अगर आपने अपने घर में मां की चौकी लगाई है, घटस्थापना और अखंड ज्योति प्रज्वलित की है तो घर को कभी भी अकेला न छोड़े। ज्योति का पूर्ण सरंक्षण करें। ध्यान रखें की ज्योति पूरे नौ दिन तक बुझनी नहीं चाहिए।

नवरात्रि के दिनों में सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। खाने में प्याज लहसुन का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्याज-लहसुन को तामसिक भोजन माना गया है। इन नौ दिनों में भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना।

ये दिन बहुत ही पवित्र होते हैं। इसलिए नवरात्रि में स्त्री पुरुष दोनों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। अपने मन को नियंत्रण में रखना चाहिए। किसी के प्रति ईर्ष्या और घृणा की भावना मन में नहीं रखनी चाहिए।

जो लोग नौ दिन का व्रत करते हैं, उन्हें भूलकर भी किसी भी तरह के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। फलाहार करते हुए ही व्रत करना चाहिए।

स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करके ही पूजन करना चाहिए। व्रत करने वाले को चमड़े से बनी चीजों जैसे बेल्ट, पर्स और जूते चप्पलों आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

इन नौ दिनों में दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए न ही नाखून काटने चाहिए।