कागज और पेंसिल से बना पोर्टेबल हीटर

कागज और पेंसिल से बना पोर्टेबल हीटर : भारतीय वैज्ञानिकों ने कागज और पेंसिल की मदद से एक छोटा पोर्टेबल हीटर बनाया है। इसका उपयोग ऐसे कार्यों में किया जा सकता है जिनमें कम तापमान की आवश्यकता होती है। सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय, पुणे के इलेक्ट्रॉनिक्स विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा कागज आधारित हीटर बनाने की तकनीक विकसित की गई है।

यह हीटर एल्युमिनियम फॉयल, कॉपर वायर, ग्लास शीट, पेपर बाइंडिंग क्लिप और बैटरी को पेंसिल और नोटबुक पेपर के साथ मिलाकर बनाया गया है। पहले दो इंच लंबी और डेढ़ इंच चौड़ी 75 माइक्रोमीटर मोटाई वाले सामान्य कागज की सतह पर 9बी ग्रेड की पेंसिल से डीप शेडिंग की गई और फिर इस पेपर को 0.2 सेंटीमीटर मोटी कांच की चादरों के बीच रखा गया। फिर, इस प्लेट को एल्युमिनियम फॉयल और कॉपर वायर द्वारा 5 वोल्ट बैटरी सर्किट से जोड़ा गया। एल्यूमीनियम पन्नी और तांबे के तार पेंसिल ग्रेफाइट मिश्रित परतों के बीच उचित संपर्क सुनिश्चित करने के लिए दो बाध्यकारी क्लिप की मदद से इस हीटर जैसी संरचना को कसकर तय किया गया था। हीटर में लगे कागज में पेंसिल की ग्रेफाइट की परत विद्युत धारा के कारण गर्म हो जाती है, जो कांच की शीट को गर्म कर देती है। इस तरह यह संरचना हीटर की तरह काम करती है।

कागज और कांच की चादरों के स्थान पर, पारदर्शिता शीट और ओवरहेड प्रोजेक्टर की धातु की प्लेटें भी हीटर बनाने के लिए उपयोगी पाई गई हैं। इस प्रकार के पोर्टेबल हीटर में अधिकतम तापमान 60 डिग्री सेल्सियस तक होता है। जबकि कागज से बने हीटर का अधिकतम तापमान 100 डिग्री तक पाया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार एक ही पेपर या ट्रांसपेरेंसी शीट को हीटर में पंद्रह बार से ज्यादा इस्तेमाल किया जा सकता है।

लीड रिसर्चर अमित मोरारका ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “लगभग 218-246 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर कागज जलने लगता है। इस पोर्टेबल हीटर में अधिकतम तापमान केवल 100 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंचता है, जिससे इसमें कागज नहीं जलता है। इस हीटर को एक आसानी से मोड़ने वाले लचीले रूप के लिए भी डिज़ाइन किया गया है, जिसका उपयोग शरीर में जोड़ों और मांसपेशियों को सुन्न करने के लिए किया जा सकता है। यह हीटर लो वोल्टेज बैटरी या डीसी करंट का उपयोग करता है, इसलिए बिजली के झटके का कोई खतरा नहीं है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह हीटर अनुसंधान प्रयोगशालाओं, बायोमेडिकल और शारीरिक मांसपेशियों के संलयन के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। बैटरी से चलने के कारण इसे दूर-दराज के इलाकों में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा स्कूल-कॉलेजों में बिजली के नियम समझाने और प्रयोग में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

हीटर बनाने की यह नई तकनीक पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ सुरक्षित, सस्ती और सरल है। यह शोध करेंट साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं में अमित मोरारका के अलावा डॉ. अदिति सी. जोशी शामिल हैं।

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