अघन मास प्रारंभ हो गया है, यदि आप इस उपाय को शंख आदि से करते हैं तो बुरा कार्य होगा।

शुरू हो चुका है अगहन मास, बनेंगे बिगड़े काम अगर शंख आदि चीजों से करेंगे यह उपाय

ऐसा माना जाता है कि सतयुग में देवताओं ने वर्ष की शुरुआत मार्गशीर्ष महीने की पहली तारीख को की थी। दरअसल, अघन को मार्गशीर्ष के नाम से भी जाना जाता है। इसको लेकर कई तरह के तर्क दिए जाते हैं, कई लोक कथाएं भी प्रचलित हैं।

हिंदू कैलेंडर में हर महीने का अपना महत्व होता है। अघन का महीना हिंदुओं के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस महीने का नाम खुद भगवान ने रखा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसा माना जाता है कि सतयुग में देवताओं ने वर्ष की शुरुआत मार्गशीर्ष महीने की पहली तारीख को की थी। दरअसल, अघन को मार्गशीर्ष के नाम से भी जाना जाता है। इसको लेकर कई तरह के तर्क दिए जाते हैं, कई लोक कथाएं भी प्रचलित हैं। कुछ का जिक्र हमें पुराणों में भी मिलता है, लेकिन यहां हम आपको इस महीने से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।

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ऐसा माना जाता है कि इस महीने में भगवान विष्णु या उनके स्वयं के रूप भगवान कृष्ण की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यह महीना उनकी पूजा के लिए सबसे अच्छे महीनों में से एक माना जाता है।

कहा जाता है कि यदि किसी शंख की पूजा कर उसमें जल भरकर भगवान विष्णु को अर्पित किया जाए और उसी जल को पूरे घर में छिड़का जाए तो कष्ट, दोष, कलह का निवारण होता है। और घर में शांति रहती है।

शंख को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। यह भी उल्लेख मिलता है कि समुद्र मंथन के समय शंख समुद्र से निकला था, जिसके कारण इस महीने में शंख पूजा का महत्व बढ़ जाता है।

नया शंख खरीदना और भगवान के पास रखकर उसकी पूजा करना भी विशेष पुण्य फल देता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान अगर भगवान से किसी भी तरह की मनोकामना की जाती है तो दुखों से मुक्ति मिलती है तो मन्नत जरूर पूरी होती है।

इस महीने में भगवान दत्तात्रेय की जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए उनकी पूजा से विशेष फल की प्राप्ति भी होती है।

अघन के महीने में चंद्रमा को सुधा प्राप्त हुई थी, जिसके कारण यह महीना भगवान की कृपा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा की पूजा सबसे उत्तम मानी जाती है।

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इतना ही नहीं अगर आपके घर में भगवद्गीता है तो दिन में एक बार उसकी पूजा जरूर करें, इससे भगवान की कृपा मिलती है।

इसे हिंदू कैलेंडर का नौवां महीना माना जाता है। इसलिए विद्वानों का मत है कि पवित्र नदियों में स्नान कर शुद्ध मन से भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।

यह भी कहा जाता है कि कश्यप ऋषि ने इसी महीने कश्मीर के क्षेत्र को बसाया था और पृथ्वी पर अपनी सुंदर कल्पना को साकार किया था, जिससे इसका महत्व भी बढ़ जाता है।

– कमल सिंघी

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