दस्त से लेकर बदहजमी तक को दूर भगा देता है आक का पत्ता

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हम सभी को जब भी कोई बीमारी होती है तो हम दवाई लेते हैं हालाँकि उसके कई घरेलू उपचार होते हैं जो हम कर सकते हैं लेकिन हमे अधिक भरोसा दवाई पर होता है. ऐसे में आज हम आक के घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं. जी दरअसल महर्षि चरक ने लिखा है, “आक में ऐसी आग है जो व्यक्ति के रोग को जलाती नहीं सुखाती है.’ आप सभी को बता दें कि आक किसी भी जगह अपने आप उगने वाली औषधीय वनस्पति है और इस वनस्पति को पशु पक्षी भी नहीं खाते हैं. आइए जानते हैं इससे कौन -कौन से रोग सही हो जाते हैं.

जुकाम या नजला –  कहा जाता है आक के फूलों को पानी में उबालकर, पानी छानकर जरा-सी शक्कर मिलाकर पीने से सारा जुकाम निकल जाता है और तबियत ठीक हो जाती है. इसी के साथ आक के पेड़ की छाल पानी में औटाकर शहद डालकर पीने से काफी लाभ होता है. आप चाहे तो एक चम्मच अजवायन, दो माशे आक के फूलों की भस्म तथा 5 ग्राम गुड़ एक साथ लेने से जुकाम निकल जाता है. वहीं आधा चम्मच सोंठ और थोड़ी-सी आक के पेड़ की छाल की चाय पीने से काफी लाभ होता है. इसी के साथ अदरक, कालीमिर्च, लौंग, आक की भस्म और तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से काफी लाभ होता है.

खांसी- अगर आपको खांसी है तो चार मुनक्कों के बीज निकालकर तवे पर भून लें और फिर इसमें 2 ग्राम आक के फूल तथा पांच दाने कालीमिर्च के मिलाकर चटनी पीस लें. अब सुबह-शाम इस चटनी का सेवन करने से हर प्रकार की खांसी चली जाता है.

अजीर्ण (बदहज़मी)  – अगर आपको बदहजमी है तो मूली के दो चम्मच रस में आक की छाल को जलाकर उसकी एक रत्ती भस्म मिलाकर सेवन करें. इसी के साथ आप चाहे तो दो कलियां लहसुन, एक चम्मच नींबू का रस, एक टुकड़ा अदरक, जरा-सा धनिया, चार दाने कालीमिर्च तथा आधा चम्मच जीरा-सबको पीसकर चटनी बना लें. इस चटनी में एक रत्ती आक की भस्म मिला लें. इसमें से थोड़ी-सी चटनी भोजन के साथ सेवन करें. इस चटनी से अजीर्ण रोग दूर हो जाता है.

दस्त – अगर आपको दस्त लग गए हैं तो10 ग्राम सौंफ, 20 ग्राम धनिये के दाने तथा 10 ग्राम जीरा पीसकर चूर्ण बना लें. तीनों चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में आक के फूलों की भस्म में मिला लें. इसमें से एक चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करें. इस के साथ आक की छाल का चूर्ण देशी घी में मिलाकर पेट पर मलें. आप चाहे तो कच्ची बेल को भूनकर उसका गूदा निकाल लें. उसमें एक रत्ती आक की छाल का चूर्ण मिलाकर सेवन करें. इसी के साथ आक के फूल तथा सूखे आंवले को पानी में भिगो दें फिर निथार कर दो-दो चम्मच पानी सुबह-शाम पीने से दस्त बंद हो जाते हैं. आपको दस्त हैं तो आक की भस्म एक रत्ती जीरे के चूर्ण के साथ लेने से हर प्रकार के दस्त में ले सकते हैं.

हम सभी को जब भी कोई बीमारी होती है तो हम दवाई लेते हैं हालाँकि उसके कई घरेलू उपचार होते हैं जो हम कर सकते हैं लेकिन हमे अधिक भरोसा दवाई पर होता है. ऐसे में आज हम आक के घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं. जी दरअसल महर्षि चरक ने लिखा है, “आक में ऐसी आग है जो व्यक्ति के रोग को जलाती नहीं सुखाती है.’ आप सभी को बता दें कि आक किसी भी जगह अपने आप उगने वाली औषधीय वनस्पति है और इस वनस्पति को पशु पक्षी भी नहीं खाते हैं. आइए जानते हैं इससे कौन -कौन से रोग सही हो जाते हैं.

जुकाम या नजला –  कहा जाता है आक के फूलों को पानी में उबालकर, पानी छानकर जरा-सी शक्कर मिलाकर पीने से सारा जुकाम निकल जाता है और तबियत ठीक हो जाती है. इसी के साथ आक के पेड़ की छाल पानी में औटाकर शहद डालकर पीने से काफी लाभ होता है. आप चाहे तो एक चम्मच अजवायन, दो माशे आक के फूलों की भस्म तथा 5 ग्राम गुड़ एक साथ लेने से जुकाम निकल जाता है. वहीं आधा चम्मच सोंठ और थोड़ी-सी आक के पेड़ की छाल की चाय पीने से काफी लाभ होता है. इसी के साथ अदरक, कालीमिर्च, लौंग, आक की भस्म और तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से काफी लाभ होता है.

खांसी- अगर आपको खांसी है तो चार मुनक्कों के बीज निकालकर तवे पर भून लें और फिर इसमें 2 ग्राम आक के फूल तथा पांच दाने कालीमिर्च के मिलाकर चटनी पीस लें. अब सुबह-शाम इस चटनी का सेवन करने से हर प्रकार की खांसी चली जाता है.

अजीर्ण (बदहज़मी)  – अगर आपको बदहजमी है तो मूली के दो चम्मच रस में आक की छाल को जलाकर उसकी एक रत्ती भस्म मिलाकर सेवन करें. इसी के साथ आप चाहे तो दो कलियां लहसुन, एक चम्मच नींबू का रस, एक टुकड़ा अदरक, जरा-सा धनिया, चार दाने कालीमिर्च तथा आधा चम्मच जीरा-सबको पीसकर चटनी बना लें. इस चटनी में एक रत्ती आक की भस्म मिला लें. इसमें से थोड़ी-सी चटनी भोजन के साथ सेवन करें. इस चटनी से अजीर्ण रोग दूर हो जाता है.

दस्त – अगर आपको दस्त लग गए हैं तो10 ग्राम सौंफ, 20 ग्राम धनिये के दाने तथा 10 ग्राम जीरा पीसकर चूर्ण बना लें. तीनों चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में आक के फूलों की भस्म में मिला लें. इसमें से एक चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करें. इस के साथ आक की छाल का चूर्ण देशी घी में मिलाकर पेट पर मलें. आप चाहे तो कच्ची बेल को भूनकर उसका गूदा निकाल लें. उसमें एक रत्ती आक की छाल का चूर्ण मिलाकर सेवन करें. इसी के साथ आक के फूल तथा सूखे आंवले को पानी में भिगो दें फिर निथार कर दो-दो चम्मच पानी सुबह-शाम पीने से दस्त बंद हो जाते हैं. आपको दस्त हैं तो आक की भस्म एक रत्ती जीरे के चूर्ण के साथ लेने से हर प्रकार के दस्त में ले सकते हैं.