Facebook लेगा विवादित पोस्ट पर लेगा आखिरी फैसला

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सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने एक इंडिपेंडेट बोर्ड का ऐलान किया है जो ये तय करेगा कि किस तरह के कॉन्ट्रोवर्सियल कॉन्टेंट फेसबुक से हटाए जाएं. ये बोर्ड कॉन्टेंट मॉडरेशन पर काम करेगी.इस बोर्ड में डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री भी शामिल हैं. इनके अलावा फेसबुक द्वारा बनाए गए इस कथित इंडिपेंडेट बोर्ड में एक नॉबेल प्राइज विनर और कई लॉ एक्सपर्ट्स भी रहेंगे.शुरुआत में कंपनी ने इस बोर्ड इस बोर्ड में 16 मेंबर्स रखेगी, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 तक किया जा सकता है. फेसबुक का ये बोर्ड ये तय केगा कि किस तरह के पोस्ट को फेसबुक से हटाया जाना चाहिए और इसके लिए वो फेसबुक के सीईओ की बात मानने के लिए बाध्य नहीं होगा.

इसके साथ ही फेसबुक द्वारा बनाए गए इस इंडिपेंडेट बोर्ड को फेसबुक का सुप्रीम कोर्ट भी कहा जा रहा है. रिपोर्ट के मुकाबिक फेसबुक के इस ‘सुप्रीम कोर्ट’ में कंपनी के मुखिया मार्क जकरबर्ग भी ये फैसला बदल नहीं सकेंगे कि कौन सा पोस्ट फेसबुक या इंस्टाग्राम से हाटाया जाना चाहिए.गौरतलब है कि फेसबुक कॉन्टेंट मॉडरेशन को लेकर लंबे समय से सवालों के घेरे में रहा है. इसी वजह से कंपनी ने फेसबुक से ट्रेंडिंग सेक्शन तक हटा दिया था, क्योंकि कंपनी पर आरोप थे कि ट्रेंडिंग को कंपनी अपने फायदे के लिए मैनिपुलेट करती है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें की फेसबुक ने कहा है कि इस बोर्ड में शामिल किए गए मेंबर्स 27 देशों में रह चुके हैं और वो 29 भाषाओं की समझ है. इस बोर्ड के चार को-चेयर हैं जो अमेरिका के ही हैं. इसके अलावा एक चौथाई मेंबर्स भी अमेरिका के ही हैं. आपको पता ही होगा फेसबुक एक अमेरिकी कंपनी है.फेसबुक ने अपने एक ब्लॉगपोस्ट में कहा है कि ये बोर्ड कॉन्टेंट मॉडरेशन के एक नए मॉडल को रिप्रेजेंट करेगा. फेसबुक के इस बोर्ड में जर्नलिस्ट, जज, डिजिटल राइट ऐक्टिविस्ट और सरकार के पूर्व एडवाइजर को रखा गया है जो अलग-अलग देशों से हैं.

सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने एक इंडिपेंडेट बोर्ड का ऐलान किया है जो ये तय करेगा कि किस तरह के कॉन्ट्रोवर्सियल कॉन्टेंट फेसबुक से हटाए जाएं. ये बोर्ड कॉन्टेंट मॉडरेशन पर काम करेगी.इस बोर्ड में डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री भी शामिल हैं. इनके अलावा फेसबुक द्वारा बनाए गए इस कथित इंडिपेंडेट बोर्ड में एक नॉबेल प्राइज विनर और कई लॉ एक्सपर्ट्स भी रहेंगे.शुरुआत में कंपनी ने इस बोर्ड इस बोर्ड में 16 मेंबर्स रखेगी, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 तक किया जा सकता है. फेसबुक का ये बोर्ड ये तय केगा कि किस तरह के पोस्ट को फेसबुक से हटाया जाना चाहिए और इसके लिए वो फेसबुक के सीईओ की बात मानने के लिए बाध्य नहीं होगा.

इसके साथ ही फेसबुक द्वारा बनाए गए इस इंडिपेंडेट बोर्ड को फेसबुक का सुप्रीम कोर्ट भी कहा जा रहा है. रिपोर्ट के मुकाबिक फेसबुक के इस ‘सुप्रीम कोर्ट’ में कंपनी के मुखिया मार्क जकरबर्ग भी ये फैसला बदल नहीं सकेंगे कि कौन सा पोस्ट फेसबुक या इंस्टाग्राम से हाटाया जाना चाहिए.गौरतलब है कि फेसबुक कॉन्टेंट मॉडरेशन को लेकर लंबे समय से सवालों के घेरे में रहा है. इसी वजह से कंपनी ने फेसबुक से ट्रेंडिंग सेक्शन तक हटा दिया था, क्योंकि कंपनी पर आरोप थे कि ट्रेंडिंग को कंपनी अपने फायदे के लिए मैनिपुलेट करती है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें की फेसबुक ने कहा है कि इस बोर्ड में शामिल किए गए मेंबर्स 27 देशों में रह चुके हैं और वो 29 भाषाओं की समझ है. इस बोर्ड के चार को-चेयर हैं जो अमेरिका के ही हैं. इसके अलावा एक चौथाई मेंबर्स भी अमेरिका के ही हैं. आपको पता ही होगा फेसबुक एक अमेरिकी कंपनी है.फेसबुक ने अपने एक ब्लॉगपोस्ट में कहा है कि ये बोर्ड कॉन्टेंट मॉडरेशन के एक नए मॉडल को रिप्रेजेंट करेगा. फेसबुक के इस बोर्ड में जर्नलिस्ट, जज, डिजिटल राइट ऐक्टिविस्ट और सरकार के पूर्व एडवाइजर को रखा गया है जो अलग-अलग देशों से हैं.