Corona में 2 गुना से भी ज़्यादा का हो गया यह कारोबार, पूरे नहीं हो पा रहे ऑर्डर….

Corona में 2 गुना से भी ज़्यादा का हो गया यह कारोबार, पूरे नहीं हो पा रहे ऑर्डर....

नई दिल्ली. देश में जब से कोरोना का कहर शुरु हुआ है, तो शायद ही ऐसा कोई कारोबार हो जो मंदा न पड़ा हो. लेकिन कोरोना और लॉकडाउन के बाद भी एक कारोबार ऐसा था जिसके ऑर्डर रात-दिन काम करने के बाद भी पूरे नहीं हो पा रहे थे. यह कारोबार है सोडियम हाइपोक्लोराइट (Sodium hypochlorite) का. 5 महीने पहले से ही सोडियम हाइपोक्लोराइट का प्रोडक्शन कम और डिमांड ज़्यादा हो गई है. जो एक यूनिट कोरोना से पहले हर महीने 25 से 30 टन का प्रोडक्शन कर रहीं थी, उसी कंपनी के पास अब 60 टन सोडियम हाइपोक्लोराइट हर महीने की सप्लाई के ऑर्डर हैं.

कोरोना में सोडियम हाइपोक्लोराइट का ऐसे हो रहा है इस्तेमाल

रोहतक में कारोबारी सूर्यांशु का कहना है, कोरोना के दौरान यह अहम हो गया है कि जिस सामान को भी हम छू रहे हैं वो सैनिटाइज किया जाए. सोडियम हाइपोक्लोराइट ठोस वस्तुओं जैसे फर्श, दरवाजे, कुंडी, बाथरूम, वाशबेसिन और स्टील से बने सामान पर से किसी भी प्रकार के वायरस का प्रभाव खत्म करने के काम आता है. इस तरह के सामान को सैनिटाइज करने में इसका इस्तेमाल बेहतर माना गया है. हरियाणा, दिल्ली और यूपी में इसकी खासी सप्लाई हो रही है. नगर निगम और ज़िला पंचायतों में इसका खूब इस्तेमाल किया जा रहा है.

कोरोना से पहले इस काम आता था सोडियम हाइपोक्लोराइट
सोडियम हाइपोक्लोराइट के कारोबार से जुड़े जानकार बताते हैं, इसका उत्पादन खासतौर से हरियाणा के रोहतक, पानीपत, गुरुग्राम, रेवाड़ी आदि शहरों में होता है. कोरोना से पहले सोडियम हाइपोक्लोराइट कैमिकल टैक्सटाइल उद्योग में रूई, कपड़ों को ब्लीच करने में होता था. रेडिमेड कपड़ों जैसे जींस में सफेद रंग लाने के लिए इस केमिकल का उपयोग खासतौर पर किया जाता है. खासतौर से टैक्सटाइल इंडस्ट्री में इसकी डिमांड रहती है. इसे तैयार करने के लिए इसमे इस्तेमाल होने वाली क्लोरीन गैस गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र से मंगाई जाती है. जानकारों का कहना है कि टैक्सटाइल इंडस्ट्री की डिमांड इस कारोबार को जिंदा रखे हुई थी, लेकिन अब सोडियम हाइपोक्लोराइट का बाज़ार फिर से गर्म हो गया है.