31 साल बाद सचिन को लेकर हुआ बड़ा खुलासा इस शख्स की सलाह से बदल गई जिंदगी

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मास्टर ब्लास्टर Sachin Tendulkar ने 16 साल की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ 1989 में अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर का आगाज किया था. Sachin Tendulkar को अपने पहले ही मैच में वसीम अकरम और वकार यूनुस का सामना करना पड़ा था और वे पहली पारी में मात्र 15 रन बना पाए थे. Sachin Tendulkar ने 31 साल बाद खुलासा किया कि उस पारी के बाद जब वे निराश थे तब उन्हें Ravi Shastri ने जो सलाह दी थी उससे उनकी जिंदगी बदल गई. Sachin Tendulkar को पहली पारी के बाद ऐसा लगने लगा था वो इस स्तर पर खेलने के लायक ही नहीं हैं. Sachin Tendulkar ने इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन के साथ स्काय स्पोर्ट्स पर अपने अनुभव को साझा किया. सचिन तेंडुलकर ने कहा, ‘मुझे तो सबसे पहले किसी तरह से कुछ पता ही नहीं चल रहा था और इस बात को मुझे स्वीकार करना होगा. वसीम और वकार बहुत ही तेज रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे थे और वे शॉर्ट पिच गेंद डाल रहे थे. हर एक शॉर्ट गेंद डराने वाली थी. मैंने इससे पहले ऐसे किसी चीज का अनुभव किया ही नहीं था लिहाजा मेरा पहला विदेशी दौरा बिल्कुल भी अच्छा नहीं था.’

पहली पारी के बाद निकलने वाले थे आंसू: सचिन ने कहा, ‘मैं उनकी पेस और बाउंस से बीट हो रहा था और 15 रन बनाकर मैं आउट हो गया. जब मैं ड्रेसिंग रूम में वापस लौट रहा था तो काफी शर्मिंदगी महसूस कर रहा था. मैं सोच रहा था कि आखिरी मैंने ये क्या किया, इस तरह से क्यों खेला और जब ड्रेसिंग रूम पहुंचा तो सीधा बाथरूम में चला गया. मेरी आंखों से आंसू निकलने वाले थे. मैं ऐसा महसूस कर रहा था यह जगह मेरे लिए नहीं है. मैं अपने आप को देखकर सवाल कर रहा था. लगता है जैसे यह पहला और आखिरी टूर होने वाला है. मुझे लग रहा था इस स्तर पर खेलने के लायक मैं हूं ही नहीं. मैं बहुत ही ज्यादा निराश था और हारा हुआ महसूस कर रहा था.’ रवि शास्त्री ने दी शानदार सलाह: उन्होंने कहा, तब सीनियर खिलाड़ी Ravi Shastri ने मुझे आकर पूछा क्या हुआ, उन्हें मैने बताया कि मैं रफ्तार के आगे मात खा गया. इस पर Ravi Shastri ने कहा, ऐसा कई लोगों के साथ होता है चिंता मत करो. तुम बस जाओ और मैदान में आधा घंटा बिताने की कोशिश करो उसके बाद उनकी गति की तुम्हें आदत हो जाएगी और सब ठीक हो जाएगा.’

सचिन तेंडुलकर ने रवि शास्त्री की इस सलाह पर अमल किया और फैसलाबाद में हुए अगले टेस्ट में उन्होंने वसीम अकरम और वकार यूनुस के सामने 59 रनों की पारी खेली. इसके बाद तो सचिन ने कभी मुड़कर नहीं देखा और उन्होंने अपने चमकीले करियर में कीर्तिमानों का अंबार लगा दिया. उन्होंने 200 टेस्ट मैचों में 53.78 की औसत से 15921 रन बना डाले. उन्होंने इस दौरान 51 शतक और 68 अर्द्धशतक लगाए.

मास्टर ब्लास्टर Sachin Tendulkar ने 16 साल की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ 1989 में अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर का आगाज किया था. Sachin Tendulkar को अपने पहले ही मैच में वसीम अकरम और वकार यूनुस का सामना करना पड़ा था और वे पहली पारी में मात्र 15 रन बना पाए थे. Sachin Tendulkar ने 31 साल बाद खुलासा किया कि उस पारी के बाद जब वे निराश थे तब उन्हें Ravi Shastri ने जो सलाह दी थी उससे उनकी जिंदगी बदल गई. Sachin Tendulkar को पहली पारी के बाद ऐसा लगने लगा था वो इस स्तर पर खेलने के लायक ही नहीं हैं. Sachin Tendulkar ने इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन के साथ स्काय स्पोर्ट्स पर अपने अनुभव को साझा किया. सचिन तेंडुलकर ने कहा, ‘मुझे तो सबसे पहले किसी तरह से कुछ पता ही नहीं चल रहा था और इस बात को मुझे स्वीकार करना होगा. वसीम और वकार बहुत ही तेज रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे थे और वे शॉर्ट पिच गेंद डाल रहे थे. हर एक शॉर्ट गेंद डराने वाली थी. मैंने इससे पहले ऐसे किसी चीज का अनुभव किया ही नहीं था लिहाजा मेरा पहला विदेशी दौरा बिल्कुल भी अच्छा नहीं था.’

पहली पारी के बाद निकलने वाले थे आंसू: सचिन ने कहा, ‘मैं उनकी पेस और बाउंस से बीट हो रहा था और 15 रन बनाकर मैं आउट हो गया. जब मैं ड्रेसिंग रूम में वापस लौट रहा था तो काफी शर्मिंदगी महसूस कर रहा था. मैं सोच रहा था कि आखिरी मैंने ये क्या किया, इस तरह से क्यों खेला और जब ड्रेसिंग रूम पहुंचा तो सीधा बाथरूम में चला गया. मेरी आंखों से आंसू निकलने वाले थे. मैं ऐसा महसूस कर रहा था यह जगह मेरे लिए नहीं है. मैं अपने आप को देखकर सवाल कर रहा था. लगता है जैसे यह पहला और आखिरी टूर होने वाला है. मुझे लग रहा था इस स्तर पर खेलने के लायक मैं हूं ही नहीं. मैं बहुत ही ज्यादा निराश था और हारा हुआ महसूस कर रहा था.’ रवि शास्त्री ने दी शानदार सलाह: उन्होंने कहा, तब सीनियर खिलाड़ी Ravi Shastri ने मुझे आकर पूछा क्या हुआ, उन्हें मैने बताया कि मैं रफ्तार के आगे मात खा गया. इस पर Ravi Shastri ने कहा, ऐसा कई लोगों के साथ होता है चिंता मत करो. तुम बस जाओ और मैदान में आधा घंटा बिताने की कोशिश करो उसके बाद उनकी गति की तुम्हें आदत हो जाएगी और सब ठीक हो जाएगा.’

सचिन तेंडुलकर ने रवि शास्त्री की इस सलाह पर अमल किया और फैसलाबाद में हुए अगले टेस्ट में उन्होंने वसीम अकरम और वकार यूनुस के सामने 59 रनों की पारी खेली. इसके बाद तो सचिन ने कभी मुड़कर नहीं देखा और उन्होंने अपने चमकीले करियर में कीर्तिमानों का अंबार लगा दिया. उन्होंने 200 टेस्ट मैचों में 53.78 की औसत से 15921 रन बना डाले. उन्होंने इस दौरान 51 शतक और 68 अर्द्धशतक लगाए.

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