स्पनपान से जुड़े 10 मिथकों की सच्चाई (10 Breastfeeding Myths Busted)

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स्पनपान से जुड़े 10 मिथकों की सच्चाई (10 Breastfeeding Myths Busted)

स्तनपान शिशुओं के लिए प्रकृति का सबसे उत्तम आहार है, क्योंकि मां के गर्भ से जब शिशु जन्म लेकर इस दुनिया में आता है तो सबसे पहले मां उसे अपना दूध पिलाती हैै, जो उसके लिए अमृत होता है. स्तनपान यानी ब्रेस्ट फीडिंग से शिशु को न स़िर्फ पोषण मिलता है, बल्कि इसे शिशु के लिए कई तरह से फ़ायदेमंद भी माना जाता है. ब्रेस्ट फीडिंग की अहमियत को जन-जन तक पहुंचाने के मक़सद से ही हर साल अगस्त महीने की 1 से 7 तारीख़ तक वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक मनाया जाता है, लेकिन आज भी महिलाओं के मन में स्तनपान से जुड़े कई सवाल हैं, जिनके जवाब वो नहीं जानतीं. इस लेख के माध्यम से शालिमार बाग स्थित फोर्टिस ला फेमे के नियोनेटोलॉजी विभाग के एचओडी और डायरेक्टर डॉक्टर विवेक जैन बता रहे हैं स्तनपान से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई.

शिशु के जन्म के बाद स्तनपान कराने की प्रक्रिया बेहद सामान्य है, लेकिन सही जानकारी के अभाव के कारण शिशु को स्तनपान करानेवाली मांओं के मन में कई प्रकार के भ्रम होते हैं, जो कि वास्तव में सच नहीं होते हैं.
मिथक- कई मांओं में दूध कम बनता है.
सच्चाई- क़रीब 95 फ़ीसदी महिलाएं डिलीवरी के बाद पहले दिन से ही अपने नवजात शिशु को स्तनपान कराने में सक्षम होती हैं. हालांकि 3-4 दिन तक फ्लो कम होता है, लेकिन यह दूध बच्चे को सही ढंग से फीड कराने के लिए काफ़ी होता है.
मिथक- बच्चे को पर्याप्त दूध मिल रहा है या नहीं, यह जानना नामुमक़िन है.
सच्चाई- अगर बच्चा जन्म के चौथे दिन से 5-6 बार पेशाब करता है, दूध पीने के बाद सो जाता है और उसका वज़न भी बढ़ रहा है तो इसका अर्थ यह है कि उसे पर्याप्त मात्रा में दूध मिल रहा है.
मिथक- गर्मी में स्तनपान के अलावा बच्चे को अतिरिक्त पानी की आवश्कता होती है.
सच्चाई- अगर बच्चा मां का दूध पी रहा है तो उसे क़रीब 6 महीने तक पानी देने की कोई ख़ास ज़रूरत नहीं होती है.
मिथक- बच्चे को लेटकर स्तनपान नहीं कराना चाहिए.
सच्चाई- ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. दरअसल, लेटकर बच्चे को स्तनपान कराना बच्चे और मां दोनों के लिए एकदम सुरक्षित और आरामदायक होता है. इसके साथ ही हर फीड के बाद निप्पल्स को साफ़ करना भी ज़रूरी नहीं है. ऐसा करने से निप्पल्स में छाले या दरार पड़ सकते हैं.
मिथक- मिक्स फीडिंग शिशु के लिए फ़ायदेमंद होती है.
सच्चाई- अगर आप भी यही सोचती हैं कि बच्चे के लिए ब्रेस्ट फीडिंग के साथ बाहर का दूध देना फ़ायदेमंद होता है, तो आप ग़लत हैं, क्योंकि मां के दूध के साथ अगर बच्चे को बाहर का दूध भी दिया जाए तो इससे ओवर फीडिंग हो सकती है और मां के स्तन से दूध की सप्लाई भी कम हो सकती है.

मिथक- अगर मां बीमार है तो ऐसे में बच्चे को फीड न कराना ही बेहतर है.
सच्चाई- ऐसा नहीं है. अगर मां को ज़ुकाम या बुखार है तो भी वो अपने बच्चे को फीड करा सकती है. मां का दूध बच्चे के लिए एंटीबॉडीज़ होता है, जो हर बीमारी से उसकी रक्षा करता है.
मिथक- डिलीवरी के बाद तीन दिन तक निकलने वाला पीला गाढ़ा दूध शिशु को नहीं पिलाना चाहिए.
सच्चाई- नवजात शिशु को माता का पीला दूध ज़रूर पिलाना चाहिए. डिलीवरी के बाद मां के स्तन से निकलने वाला पीला गाढ़ा दूध कोलोस्ट्रम होता है, जो शिशु के भीतर संक्रामक रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है.

मिथक- मां के दूध से बाज़ार में मिलने वाला पाउडर का दूध बेहतर होता है.
सच्चाई- अगर आप भी ऐसा सोचती हैं तो यह ग़लत है, क्योंकि शिशु के लिए मां के दूध से बेहतर कुछ नहीं होता. मां के दूध में प्रचुर मात्रा में एंटीबॉडीज़ पाई जाती है, जबकि बोतल से दूध पिलाने पर बच्चे में संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

मिथक- मां को पानी जैसे तरल पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए.
सच्चाई- बच्चे को दूध पिलाने वाली मां को पानी जैसे तरल पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए.
मिथक- स्तनपान कराने से महिला के ब्रेस्ट का शेप ख़राब हो जाता है.
सच्चाई- अगर शिशु को सही तरी़के से ब्रेस्ट फीडिंग कराया जाए, तो इससे ब्रेस्ट के शेप पर कोई असर नहीं पड़ता है और यह स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर व मोटापे जैसी बीमारियों से भी बचाता है.

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स्तनपान कराने के 10 फ़ायदे
स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) शिशु को जन्म के बाद पहले 6 महीने तक स़िर्फ और स़िर्फ स्तनपान कराने की सलाह देते हैं, क्योंकि स्तनपान शिशु को जीवनदान देता है. चलिए जानते हैं स्तनपान किस तरह से मां और शिशु के लिए फ़ायदेमंद है.

1- मेडिकल एरा के मुताबिक़ मां का दूध अमृत के समान होता है. ख़ासकर जन्म से लेकर 6-8 महीने तक बच्चे की अच्छी सेहत के लिए मां का दूध बेहद आवश्यक होता है.

2- जन्म के बाद क़रीब 6 महीने तक शिशु को केवल ब्रेस्ट फीडिंग पर ही निर्भर रहना चाहिए, क्योंकि मां का दूध सुपाच्य होने के साथ ही शिशु के पेट में होने वाली गड़बड़ियों की आशंका को भी दूर करता है.

3- जो बच्चे लंबे समय तक अपनी मां का दूध पीते हैं, उनका मानसिक विकास तेज़ी से होता है और वो कम समय तक दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में अधिक बुद्धिमान होते हैं.

4- अमेरिकन एकेडमी ऑफ पिडियाट्रिक के अनुसार, छोटे बच्चे के विकास और पोषण के लिए ज़रूरी विटामिन, फैट और प्रोटीन जैसे सभी पोषक तत्व मां के दूध में मौजूद होते हैं.

5- मां के स्तन से पहली बार निकलने वाला पीले रंग का गाढ़ा दूध शिशु को पिलाने से उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और यह शिशु में एलर्जी होने के जोख़िम को भी कम करता है.

6- ब्रेस्ट फीडिंग कराने से मां को गर्भावस्था के बाद होनेवाली तकलीफ़ों से राहत मिलती है. इससे महिला का तनाव कम होता है और प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है.

7- स्तनपान कराना न स़िर्फ बच्चे की सेहत के लिए लाभदायक है, बल्कि इससे मांओं में डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड कैंसर और स्तन या गर्भाशय कैंसर होने का ख़तरा काफ़ी हद तक कम हो जाता है.

8- ब्रेस्ट फीडिंग से मां और शिशु को एक साथ ख़ास व़क्त बिताने का मौका मिलता है, जिससे मां और बच्चे दोनों को सुखद अहसास की अनुभूति होती है और दोनों के बीच भावनात्मक रिश्ता मज़बूत होता है.

9- डिलीवरी के बाद ज़्यादातर महिलाओं का वज़न बढ़ जाता है, लेकिन जब वो अपने बच्चे को दूध पिलाती हैं, तो उनका बढ़ा हुआ वज़न प्राकृतिक रूप से सामान्य होने लगता है.

10- ब्रेस्ट फीडिंग कराते समय शिशु और मां दोनों को अच्छी नींद आने लगती है, जिससे मां को कुछ समय के लिए अपने शिशु के साथ सुकून से सोने का मौका मिलता है. इससे महिला को बहुत अच्छा महसूस होता है.

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