लोगों के प्रति हमारे व्यवहार को दर्शाती है ‘शेमलैस’ -शबीना खान

लोगों के प्रति हमारे व्यवहार को दर्शाती है 'शेमलैस' -शबीना खान

क्रिएटिव प्रोड्यूसर-कॉस्ट्यूम डिजाइनर शबीना खान बॉलीवुड की कई हिट फिल्मों को प्रोड्यूज कर चुकी हैं। 2018 में आई डायरेक्टर कीथ गोम्स की ‘शेमलैस’ (Shameless) को भी शबीना ने ही प्रोड्यूूस किया है। यह शॉर्ट फिल्म इस साल 93वें ऑस्कर अवार्ड्स की शॉर्ट लाइव एक्शन कैटेगिरी में भारत की ओर से नॉमिनेशन की दौड़ में थी। इस दौड़ में विद्या बालन (vidhya balan) स्टारर ‘नटखट’, सौरव विष्णु की शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री ‘टेलिंग पोंड’, तुषार त्यागी की सेविंग चिंटू’ और एकता कपूर की ‘बिट्टु’ भी शामिल थीं। 1983 से इंडस्ट्री में काम कर रहीं शबीना ने अपना कॅरियर एक कॉस्ट्यूम डिजाइनर के रूप में शुरू किया था। हाल ही शबीना ने राजस्थान पत्रिका के साथ खास बातचीत में इंटरव्यू में फिल्म ‘शेमलैस’, प्रोड्यूसर के तौर पर आने वाले प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्री से जुड़े अन्य मुद्दों पर बात की।

‘शेमलैस’ से कैसे जुडऩा हुआ?
मैं 38 साल से इंडस्ट्री में काम कर रही हूं। 1983 में कॉस्ट्यूम डिजाइनर के तौर पर काम शुरू किया था। २००२ में सोनी के लिए एक टीवी शो बनाया। फिर साल 2010 में अक्षय कुमार के साथ ‘राउडी राठौड़’ के साथ प्रोड्यूसर की पारी शुरू की।दरअसल, यह फिल्म पूरी तरह से निर्देशक कीथ गोम्स की है। कहानी और निर्देशन सब उन्हीं ने किया है। हम दोनोंं इससे पहले ‘हे बेबी’ में साथ काम किया था। कीथ फिल्म में चीफ एडी थे और मैं कॉस्ट्यूम डिजाइन कर रही थी, तभी से हमारा जुड़ाव है। जब कीथ यह फिल्म बना रहे थे तो उन्होंने शूटिंग शुरू करने से पहले मुझसे एक प्रोड्यूसर के तौर पर इससे जुडऩे को कहा। मुझे कहानी पसंद आई और मैं इस फिल्म से जुड़ गई।

लोगों के प्रति हमारे व्यवहार को दर्शाती है 'शेमलैस' -शबीना खान

फिल्म लोगों को कैसे जोड़ सकेगी?
यह फिल्म दयालुता और इंसनियत को दर्शाती है। जो लोग हमारे लिए काम करते हैं, ऑनलाइन ऑर्डर पर खाना लाते हैं हम उनके प्रति कभी शुक्रगुजार नहीं होते। बजाय उनके साथ नर्मी से पेश आने के हम अक्सर इन लोगों पर चिल्लाते हैं जबकि हमेशा उनकी गलती नहीं होती। ये लोग भी किसी न किसी परेशानी से गुजर रहे होते हैं, लेकिन हम इस पर कभी ध्यान ही नहीं देते, एक गिलास पानी तक नहीं पूछते। फिल्म हमें ऐसे लोगों के प्रति नरमदिली और दयालु होने के लिए मोटिवेट करती है। फिल्म में एक डिलीवरी गर्ल (सयामी गुप्ता) और कोविड में वर्क फ्रॉर्म होम कर रहे एक शख्स (हुसैन दलाल) की कहानी दिखाई गई है। उस शख्स का व्यवहार डिलीवरी गर्ल के प्रति बहुत खराब है। इसके क्या नतीजे हो सकते हैं यही 15 मिनट की इस फिल्म में दिखाया गया है।

लोगों के प्रति हमारे व्यवहार को दर्शाती है 'शेमलैस' -शबीना खान

सयामी गुप्ता को लेने की कोई खास वजह?
फिल्म की कहानी लिखने के बाद ही कीथ ने सयामी और हुसैन को लीड रोल के लिए सिलेक्ट कर लिया था। क्योंकि मैं फिल्म से बहुत बाद में जुड़ी इसलिए कास्टिंग में मेरी कोई भूमिका नहीं है। फिल्म के लीड एक्टर्स को लेकर कीथ बिल्कुल स्पष्ट थे कि उन्हें हुसैैन दलाल और सयामी को ही लेना है। वे बहुत अच्छी अदाकारा हैं। सयामी ने पहले भी कुछ प्रोजेक्ट्स में बहुत अच्छा काम किया है। बतौर प्रोड्यूसर मैंने कीथ को पूरी लिबर्टी दी की वे अपने ढंग से काम कर सकें।

लोगों के प्रति हमारे व्यवहार को दर्शाती है 'शेमलैस' -शबीना खान

दर्शकों को थिएटर तक लाने के लिए सबसे अहम क्या है?
मेरे विचार में कुछ खास बदलाव नहीं आया है। दर्शकों को थिएटर्स तक खींचकर लाने के लिए पहले भी कॉन्टेंट ही अहम था आज भी है और आगे भी अच्छा कॉन्टेंट ही महत्वपूर्ण होगा। फिर चाहे दर्शक टीवी देखें, सिनेमाहॉल जाएं या ओटीटी पर फिल्म देखें, कॉन्टेंट की इम्पोर्टेंट हैं। मैं अपनी फिल्मों में कॉन्टेंट विद मैसेज के साथ दर्शकों को एंटरटेन करने पर फोकस करती हूं। अगर कॉन्टेंट अच्छा है तो ही दर्शक फिल्म से जुड़ेगे। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है एड फिल्म- एक अच्छी स्टोरी कॉन्टेंट वाली 2 मिनट की एड फिल्म से हम कितनी जल्दी जुड़ाव महसूस करते हैं। मेरे खयाल में जिस कहानी को आप एक लाइन में समझा सकें वही कॉन्टेंट दश्रकों को जोड़ सकता है। मैं अभी बहुत-सी अच्छी कहानियां सुन रही हूं। अलगे एक से डेढ़ साल में इनमें से कुछ अच्छी कहानियों पर फिल्में बनाऊंगी। थिएटर्स भी खुल रहे हैं। ऐसे में कॉन्टेंट पर कितना खर्च होगा उसी हिसाब से मैं कोई स्टोरी फाइनली लॉक करूंगी।

फिल्म में कॉस्टूयम डिजाइन कितनी अहम भूमिका निभाता है?
कॉस्ट्यूम और उसके डिजाइनर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। एक्टर का कैरेक्टर उससे नजर आता है। जो डायलॉग वह बोलता है, जो जज्बात वह दिखाना चाहता है वह सब कॉस्ट्यूम से और उभरकर आता है। किसी कैरेक्टर को पर्दे पर उतारने के लिए कॉस्टूयम बहुत इम्पोर्टेंट है। फिल्म में कोई कैरेक्टर कैसा है, क्या है यह उसकी कॉस्ट्यूम से अंदाजा लग जाता है।

भानु अथैया के बाद कोई भारतीय कॉस्टयूम डिजाइनर ऑस्कर क्यों नहीं जीत पाया?
नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है कि एक ने जीता और दूसरे ने नहीं जीता। दिवंगत भानु अथैया ने ‘गांधी’ के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइन की थीं। वहीं गांधी एक हॉलीवुड फिल्म थी, इसलिए उसकी उस दौर में रीच बहुत बड़ी थी। अब क्योंकि कोई बॉलीवुड फिल्म अभी तक ऐसा नहीं कर सकी है सिर्फ इस बिना पर हम अपनी क्षमता का आंकलन नहीं कर सकते। अब भी आस्कर में कंसीडर्ड होने के लिए बॉलीवुड फिल्मों की वर्ल्ड सिनेमा में वो रीच नहीं है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि आने वाले सालों में ऐसा हो जाएगा। ऑस्कर तक पहुंचने के लिए हमें उस रीच की जरुरत है। लेकिन हो जाएगा, किसी न किसी को मिल जाएगा।

बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में काम को लेकर क्या फर्क महसूस करती हैं?
मैंने दोनों ही इंडस्ट्री में बड़े सुपरस्टार्स के साथ काम किया है। बहुत ज्यादा फर्क तो नहीं है लेकिन हां, साउथ वाले बहुत वर्क ओरिएन्टेड होते हैं और सेट पर आने के बाद अपने काम पर फोकस करते हैं। वे मजाक-मस्ती, अपनापन में ज्यादा भरोसा नहीं करते। शिद्दत से अपना काम करते हैं और शाम ५ बजे तक घर चले जााते हैं। इंडस्ट्री इज लाइक फैमिली जैसी बातों में भरोसा नहीं करते। लेकिन बॉलीवुड में ३-४ महीने की शूटिंग में यूनिट के बीच एक परिवार जैसा माहौल होता है। लंच साथ शेयर करते हैं, सेट पर मस्ती-मजाक होता है और एक फैमिली मेम्बर्स की तरह काम करते हैं। इसकेअलावा कोई खास डिफरेंस नहीं है।

ओटीटी के बारे में क्या कहेंगी?
ओटीटी इज फ्यूचर। मेरा ऐसा मानना है कि आने वाले सालों में थिएटर और ओटीटी मर्ज हो जाएंगे। अभी जिस तरह इकोनॉॅमिक नीचे जा रही है, फिल्म रिलीज होने के एक महीने बाद घर बैठकर सस्ती पिक्चर देखने से लोगों को कोई परेशानी नहीं है। खासकर तब जब पैसे बच रहे हों। इसकी बजाय अब 10 लोगों की टिकट खरीदकर, फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने का ट्रेंड बदल जाएगा। ओटीटी आगे सिनेमा का फ्यूचर बन सकता है। लोग भी इसे समझने लगे हैं।


Follow करें और दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here