मार्क जुकरबर्ग ने कर्मचारियों के विरोध के बाद लिया यह फैसला

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने एक ट्वीट किया था जिसके बाद से बवाल मचा हुआ है। ट्रंप के ट्वीट को ट्विटर ने फैक्ट चेक करके चेतावनी जारी कर दी, जबकि फेसबुक ने ट्रंप के पोस्ट का कोई फैक्ट चेक नहीं किया। ट्रंप ने जो ट्वीट किया था, उसी पोस्ट को फेसबुक पर भी शेयर किया था। ट्विटर के फैक्ट चेक के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने एक इंटरव्यू में ट्विटर की आलोचना की और कहा कि निजी कंपनियों को ऐसा नहीं करना चाहिए।जुकरबर्ग के इस बयान के बाद फेसबुक के कर्मचारियों में असंतोष देखने को मिला और कईयों ने वर्चुअली काम करने से इनकार कर दिया है। फेसबुक के कई कर्मचारियों ने ट्रंप के पोस्ट पर कोई कार्रवाई न करने के फेसबुक के फैसले पर अपनी नाराजगी जताई।

फेसबुक में सॉफ्टवेर इंजीनियर लॉरेन टैन ने कहा कि हिंसा भड़काने वाले ट्रंप के पोस्ट को हटाने के मामले में फेसबुक खामोश है, लेकिन मैं शर्मिंदा हूं, क्योंकि मैं यहा काम करता हूं। वहीं कर्मचारियों का सुझाव था कि फेसबुक अपनी नीतियों में बदलाव करे।यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले दो सप्ताह से जुकरबर्ग, ट्रंप का समर्थन कर रहे थे लेकिन कर्मचारियों के विरोध और चौतरफा आलोचना के बाद उन्होंने नीतियों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। चौतरफा विरोध के बाद मार्क जुकरबर्ग ने शुक्रवार को कहा है कि वे फेसबुक की नीतियों की समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव भी किया जाएगा। मार्क जुकरबर्ग ने ये बातें अपने एक फेसबुक पोस्ट में कही है।

उन्होंने अपने पोस्ट में ब्लैक लिव्स मैटर आंदोलन को सपोर्ट करते हुए लिखा, ‘वह ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन का समर्थन करते हैं और जल्द ही कंपनी की नीतियों की समीक्षा शुरू करेंगे। हम पुलिस बल प्रयोग और किसी देश में नागरिक हिंसा को लेकर होने वाले आंदोलन की नीतियों की समीक्षा पर जोर देंगे।’ मार्क जुकरबर्ग ने यह भी लिखा, ‘मैं अपने अश्वेत समुदाय के सदस्यों के साथ खड़ा हूं। आपका जीवन मायने रखता है। ब्लैक लिव्स मैटर।’जुकरबर्ग के पोस्ट के तुरंत बाद अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर आंदोलन के लिए समर्थन देने और विस्तृत विवरण के साथ एक ईमेल भी शेयर किया जिसमें उन्होंने उस ग्राहक के बारे में बताया जिसने किसी वक्त अमेजन वेबसाइट के ब्लैक लिव्स मैटर के बैनर के बारे में शिकायत की थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने एक ट्वीट किया था जिसके बाद से बवाल मचा हुआ है। ट्रंप के ट्वीट को ट्विटर ने फैक्ट चेक करके चेतावनी जारी कर दी, जबकि फेसबुक ने ट्रंप के पोस्ट का कोई फैक्ट चेक नहीं किया। ट्रंप ने जो ट्वीट किया था, उसी पोस्ट को फेसबुक पर भी शेयर किया था। ट्विटर के फैक्ट चेक के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने एक इंटरव्यू में ट्विटर की आलोचना की और कहा कि निजी कंपनियों को ऐसा नहीं करना चाहिए।जुकरबर्ग के इस बयान के बाद फेसबुक के कर्मचारियों में असंतोष देखने को मिला और कईयों ने वर्चुअली काम करने से इनकार कर दिया है। फेसबुक के कई कर्मचारियों ने ट्रंप के पोस्ट पर कोई कार्रवाई न करने के फेसबुक के फैसले पर अपनी नाराजगी जताई।

फेसबुक में सॉफ्टवेर इंजीनियर लॉरेन टैन ने कहा कि हिंसा भड़काने वाले ट्रंप के पोस्ट को हटाने के मामले में फेसबुक खामोश है, लेकिन मैं शर्मिंदा हूं, क्योंकि मैं यहा काम करता हूं। वहीं कर्मचारियों का सुझाव था कि फेसबुक अपनी नीतियों में बदलाव करे।यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले दो सप्ताह से जुकरबर्ग, ट्रंप का समर्थन कर रहे थे लेकिन कर्मचारियों के विरोध और चौतरफा आलोचना के बाद उन्होंने नीतियों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। चौतरफा विरोध के बाद मार्क जुकरबर्ग ने शुक्रवार को कहा है कि वे फेसबुक की नीतियों की समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव भी किया जाएगा। मार्क जुकरबर्ग ने ये बातें अपने एक फेसबुक पोस्ट में कही है।

उन्होंने अपने पोस्ट में ब्लैक लिव्स मैटर आंदोलन को सपोर्ट करते हुए लिखा, ‘वह ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन का समर्थन करते हैं और जल्द ही कंपनी की नीतियों की समीक्षा शुरू करेंगे। हम पुलिस बल प्रयोग और किसी देश में नागरिक हिंसा को लेकर होने वाले आंदोलन की नीतियों की समीक्षा पर जोर देंगे।’ मार्क जुकरबर्ग ने यह भी लिखा, ‘मैं अपने अश्वेत समुदाय के सदस्यों के साथ खड़ा हूं। आपका जीवन मायने रखता है। ब्लैक लिव्स मैटर।’जुकरबर्ग के पोस्ट के तुरंत बाद अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर आंदोलन के लिए समर्थन देने और विस्तृत विवरण के साथ एक ईमेल भी शेयर किया जिसमें उन्होंने उस ग्राहक के बारे में बताया जिसने किसी वक्त अमेजन वेबसाइट के ब्लैक लिव्स मैटर के बैनर के बारे में शिकायत की थी।