बिहार चुनाव में नीतीश की चुनौती: बढ़ी भाजपा की ताकत, घटा जेडीयू में मुस्लिमों का यकीन

बिहार चुनाव में नीतीश की चुनौती: बढ़ी भाजपा की ताकत, घटा जेडीयू में मुस्लिमों का यकीन

साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार के सीवान में एक मुस्लिम मतदाता ने बताया था कि उनके लिए ये क्यों महत्वपूर्ण नहीं था कि नीतीश कुमार की जेडीयू, भाजपा के साथ गठबंधन में थी। इसकी एक वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार द्वारा दी गई स्कूल यूनिफॉर्म उनके बेटे के पास सबसे अच्छी पोशाक थी। इसलिए उन्हें जेडीयू की ‘बी टीम’ भाजपा से कोई समस्या नहीं थी।

ये वो समय था जब बिहार में नीतीश कुमार की लोकप्रियता अपने चरम पर थी। उस साल हुए हुए लोकसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में एनडीए ने 40 में से 32 सीटें जीतीं। इसके अगले साल हुए विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार एक बार फिर सत्ता में लौटे और गठबंधन ने 243 में से 206 सीटें जीतीं।

अब ना वो नीतीश हैं और ना ही एनडीए। भाजपा अब जेडीयू के साथ समान भागीदारी का आनंद ले रही है। हालांकि 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार अपनी लोकप्रियता के चलते एक बार फिर सत्ता में वापसी करने मे सफल रहे। 17 फीसदी की मुस्लिम आबादी वाले बिहार में इस समुदाय ने बड़ी संख्या ने उनके नेतृत्व वाले महागठबंधन (जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस) के पक्ष में मतदान किया। मगर 2017 में नीतीश एक बार फिर पीछे मुड़े भाजपा के साथ चले गए। उनके इस कदम को मुस्लिम समुदाय में पीठ में छुरा घोपने जैसा देखा गया। नीतीश कुमार ने तब से बिहार गठबंधन में मुख्य भूमिका भी प्रधानमंत्री को ‘सौंप’ दी।

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2019 में हुए लोकसभा चुनाव में मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने बिहार में 40 में से रिकॉर्ड 39 सीटें जीतीं। विपक्ष में कांग्रेस सिर्फ किशनगंज सीट जीतने में कामयाब रही, जहां मुस्लिमों की आबादी 70 फीसदी से अधिक है। इस सीट पर एआईएमआईएम उम्मीदवार तीसरे पायदान पर रहा।

बता दें कि जेडीयू में कभी अली अनवर, डॉक्टर एजाज अली और डॉक्टर शकील अहमद जैसे नेता थे। पार्टी में अब एमएलसी और पूर्व राज्यसभा सांसद गुलाम रसूल बलियावी के अलावा कोई बड़ा मुस्लिम नाम नहीं है।

हालांकि जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी कहते हैं कि कब्रिस्तानों की बाड़ लगाने से लेकर तालिमी मरकज (स्कूल ड्रॉप आउट के लिए ब्रिज कोर्स) तक, हुनर ​​और औज़ार जैसे कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए नीतीश कुमार ने मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने कहा कि हज भवन और कुछ अन्य जिलों में कोचिंग सेंटर एक ग्रेट शिक्षा मॉडल है। अब ये तय करना मुस्लिम समुदाय के ऊपर है कि वो सिर्फ नारे चाहते हैं या विकास कार्य चाहते हैं।

इधर जेडीयू के पूर्व नेता अनवर कहते हैं कि उन्होंने भाजपा के बढ़ते प्रभाव के कारण पार्टी छोड़ दी। एनडीए में नीतीश की वापसी से मुस्लिमों को ठेस पहुंची है। अली अनवर वर्तमान में अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम मेहाज नाम के राजनीतिक मंच का नेतृत्व करते हैं।