फेसबुक के कर्मचारी को महंगा पड़ा ट्रंप के पोस्ट पर आपत्ति जताना

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फेसबुक ने अपने उस कर्मचारी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है जिसने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्ट का फैक्ट चेक ना करने का विरोध किया था। कर्मचारी ने पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप के एक भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग के फैसले की आलोचना की थी।फेसबुक ने अपने जिस कर्मचारी को निकाला है उनका नाम ब्रैंडन डैल है जो कि फेसबुक में यूजर इंटरफेस इंजीनियर के पद पर काम कर रहे थे। ब्रैंडन ने ट्वीट करते हुए दावा किया है कि उन्हें सार्वजनिक रूप से एक सहयोगी को डांटने के लिए बर्खास्त किया गया, जिसने ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के लिए समर्थन में अपना बयान शामिल करने से इनकार कर दिया था। वहीं फेसबुक ने डैल की बर्खास्तगी की पुष्टि की है लेकिन बर्खास्तगी के कारणों को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है।

आपकी जानकारी के लिए बता  दें कि पुलिस कस्टडी में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत को लेकर मिनेपोलिस में हो रहे प्रदर्शनों पर ट्रंप ने एक ट्वीट किया था जिसपर ट्विटर ने वॉर्निंग जारी की लेकिन उसी पोस्ट पर फेसबुक ने कहा कि यह पोस्ट कंपनी की पॉलिसी का उल्लंघन नहीं करता है। वहीं फेसबुक के इस फैसले का फेसबुक के कुछ कर्मचारियों ने विरोध किया और कहा कि वे इस पर ‘शर्मिंदा’ हैं। इसके साथ ही ट्विटर के फैक्ट चेक के बाद मार्क जुकरबर्ग ने एक इंटरव्यू में ट्विटर की आलोचना करते हुए कहा था कि निजी कंपनियों को ऐसा नहीं करना चाहिए।  वहीं जुकरबर्ग के इस बयान के बाद फेसबुक के कर्मचारियों में असंतोष देखने को मिला और कईयों ने वर्चुअली काम करने से इनकार कर दिया है। 

कई कर्मचारियों ने फेसबुक की कंटेंट पॉलिसी में बदलाव करने के भी सुझाव दिए थे। इस विरोध के बाद जुकरबर्ग ने फेसबुक की नीतियों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। उन्होंने एक पोस्ट में कहा था कि वे फेसबुक की नीतियों की समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव भी किया जाएगा। उन्होंने अपने पोस्ट में ब्लैक लिव्स मैटर आंदोलन को सपोर्ट करते हुए लिखा, ‘वह ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन का समर्थन करते हैं और जल्द ही कंपनी की नीतियों की समीक्षा शुरू करेंगे। हम पुलिस बल प्रयोग और किसी देश में नागरिक हिंसा को लेकर होने वाले आंदोलन की नीतियों की समीक्षा पर जोर देंगे।’

फेसबुक ने अपने उस कर्मचारी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है जिसने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्ट का फैक्ट चेक ना करने का विरोध किया था। कर्मचारी ने पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप के एक भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग के फैसले की आलोचना की थी।फेसबुक ने अपने जिस कर्मचारी को निकाला है उनका नाम ब्रैंडन डैल है जो कि फेसबुक में यूजर इंटरफेस इंजीनियर के पद पर काम कर रहे थे। ब्रैंडन ने ट्वीट करते हुए दावा किया है कि उन्हें सार्वजनिक रूप से एक सहयोगी को डांटने के लिए बर्खास्त किया गया, जिसने ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के लिए समर्थन में अपना बयान शामिल करने से इनकार कर दिया था। वहीं फेसबुक ने डैल की बर्खास्तगी की पुष्टि की है लेकिन बर्खास्तगी के कारणों को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है।

आपकी जानकारी के लिए बता  दें कि पुलिस कस्टडी में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत को लेकर मिनेपोलिस में हो रहे प्रदर्शनों पर ट्रंप ने एक ट्वीट किया था जिसपर ट्विटर ने वॉर्निंग जारी की लेकिन उसी पोस्ट पर फेसबुक ने कहा कि यह पोस्ट कंपनी की पॉलिसी का उल्लंघन नहीं करता है। वहीं फेसबुक के इस फैसले का फेसबुक के कुछ कर्मचारियों ने विरोध किया और कहा कि वे इस पर ‘शर्मिंदा’ हैं। इसके साथ ही ट्विटर के फैक्ट चेक के बाद मार्क जुकरबर्ग ने एक इंटरव्यू में ट्विटर की आलोचना करते हुए कहा था कि निजी कंपनियों को ऐसा नहीं करना चाहिए।  वहीं जुकरबर्ग के इस बयान के बाद फेसबुक के कर्मचारियों में असंतोष देखने को मिला और कईयों ने वर्चुअली काम करने से इनकार कर दिया है। 

कई कर्मचारियों ने फेसबुक की कंटेंट पॉलिसी में बदलाव करने के भी सुझाव दिए थे। इस विरोध के बाद जुकरबर्ग ने फेसबुक की नीतियों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। उन्होंने एक पोस्ट में कहा था कि वे फेसबुक की नीतियों की समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव भी किया जाएगा। उन्होंने अपने पोस्ट में ब्लैक लिव्स मैटर आंदोलन को सपोर्ट करते हुए लिखा, ‘वह ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन का समर्थन करते हैं और जल्द ही कंपनी की नीतियों की समीक्षा शुरू करेंगे। हम पुलिस बल प्रयोग और किसी देश में नागरिक हिंसा को लेकर होने वाले आंदोलन की नीतियों की समीक्षा पर जोर देंगे।’