पुस्तकों की इस तकनीकी दुनिया में चले आइये, ज्ञान ही ज्ञान बिखरा पड़ा है

पुस्तकों की इस तकनीकी दुनिया में चले आइये, ज्ञान ही ज्ञान बिखरा पड़ा है


बात चार या पाँच साल पहले की है। मैं अक्सर युवाओं को एयरपोर्ट पर व ट्रेन-यात्राओं में टेबलॉयड या मोबाइल फोन पर खोए हुए देखा करता था। अधिकांश लोगों की तरह उन्हें देख कर मेरे मन में भी यही विचार आता था कि ये युवा फ़ुरसत के पलों में गेम खेलकर अथवा चैटिंग या मैसेजिंग कर अपना मनोरंजन करते हैं। जब एक अवसर पर उत्सुकतावश मैंने एक युवा से पूछा कि आप कौन-सा गेम खेलते हो तो उसने अजीब तरह से मुझे देखते हुए कहा- “मैं गेम नहीं खेल रहा.. काजुओ इशिगुरो की ‘नेवर लेट मी गो’ पढ़ रहा हूँ। उसके उत्तर ने मुझे चौंकाया भी और सोचने पर विवश भी किया। उसके बाद उससे कुछ और बातें हुई। पुस्तकें पढ़ने के इस नए माध्यम को समझने की कोशिश की। हिंदी पुस्तकों में उसकी रुचि की बारे में जानकारी ली तो उसने बताया कि मैंने कुछ दिन पूर्व ही भगवतीचरण वर्मा की ‘चित्रलेखा’ और कमलेश्वर की ‘आँखों देखा पाकिस्तान’ पढ़ी है।
उस युवा से मिलकर मुझे लगा कि युवाओं पर यह आरोप लगाना कि ‘उनकी पढ़ने में रुचि नहीं है’ अनुचित है। वह पढ़ते हैं और अच्छी पुस्तकें पढ़ना भी चाहते हैं। भागमभाग भरी जिंदगी में भी पुस्तकें पढ़ने के लिए वह समय निकाल रहे हैं। इतना फर्क अवश्य आया है कि उनके पढ़ने का माध्यम पारम्परिक रूप से छपी पुस्तकें नहीं हैं अपितु हमेशा हाथ में रहने वाला स्मार्टफोन या टेबलॉयड है जिस पर वह डिजिटल माध्यम से प्रकाशित पुस्तकें, जिन्हें तकनीकी रूप से डिजिटल बुक या ई-बुक्स कहा जाता है, चाव से पढ़ते हैं।
 

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स्मार्टफोन के आने से ई-बुक्स का चलन बढ़ा है जो निरंतर बढ़ता जा रहा है। ई-बुक्स पढ़ने की शुरुआत सबसे पहले ई-रीडर से हुई थी। ई-रीडर एक ऐसा उपकरण या तकनीकी भाषा में कहें तो गैजेट है जिसे मुख्यत: ई-बुक्स पढ़ने के लिए बनाया गया है। शुरुआती दौर के ई-रीडर्स में सबसे लोकप्रिय सोनी का लायब्री गैजेट था। बाद में बहुत-सी कम्पनियों के ई-रीडर गैजेट उपलब्ध हो गए। इन गैजेट में अमेजन का किंडल, कोबो ई-रीडर तथा बार्न्स एण्ड नोबेल का नुक प्रमुख हैं। ई-बुक्स की लोकप्रियता बढ़ने से एपल भी अपने आइपैड और आइफोन गैजेट्स पर एक विशेष एप्लीकेशन (एप) के माध्यम से आईबुक्स उपलब्ध कराने लगा। गूगल भी क्यों पीछे रहता। वह अपने एंड्रायड सिस्टम वाले टैबलेट्स और स्मार्टफोन पर ई-बुक्स के लिए गूगल प्लेबुक एप लेकर आ गया। इसे डाउनलोड करने के बाद आप गूगल प्ले स्टोर से फ्री और पेमेंट करके ई-बुक्स डाउनलोड कर सकते हैं। कुछ कम्पनियों ने ई-बुक्स पढ़ने के लिए कुछ विशेष प्रकार के साफ्टवेयर मसलन किंडल रीडिंग एप्स, सोनी रीडर व कोबो रीडिंग एप्स भी बनाए हैं जिन्हें लैपटॉप व कम्प्यूटर पर इंस्टाल करके ई-बुक्स पढ़ी जा सकती हैं। आइए ई-बुक्स पढ़ने में मददगार इन एप्स के बारे में मोटी-मोटी बातें जानते हैं-
किंडल एप
अमेज़न का किंडल गैजेट सबसे लोकप्रिय गैजेट है। इसी नाम से एक एंड्रॉयड एप भी है जिसकी सहायता से इसके स्टोर में उपलब्ध किताबों को पढ़ा जा सकता है। इस एप में भाषा के कस्टमाइजेशन के विकल्प के साथ ही फॉन्ट, ब्राइटनेस व सिंक फ़ीचर भी उपलब्ध हैं। किंडल स्टोर में दस लाख से ज्यादा किताबें उपलब्ध हैं जिनमें से कुछ किताबें मुफ्त में भी उपलब्ध हैं लेकिन शेष किताबों के लिए पेमेंट करना पड़ेगा। किंडल में भारतीय पाठकों के लिए एक किंडल अनलिमिटेड पैकेज उपलब्ध है जिसके लिए हर माह एक निश्चित राशि का भुगतान करने के उपरांत अनलिमिटेड सेक्शन की सभी किताबों को पढ़ सकते हैं। अमेजन किंडल पर विभिन्न विषयों जैसे कि साहित्य, कला,आत्मकथा, इतिहास, राजनीति, खेल, धर्म, यात्रा एवं बाल साहित्य पर विशाल संख्या में हिन्दी पुस्तकें भी उपलब्ध हैं।
अलडीको एप
अलडीको एक बहुत ही आसान एंड्रॉयड ई-बुक रीडर एप है जो गूगल-प्ले पर मुफ्त में उपलब्ध है। इसका एक प्रीमियम वर्ज़न भी है जिसे पेमेंट करके डाउनलोड किया जा सकता है। इस एप की सबसे खास बात ये है कि इस एप में भाषा सहित कस्टमाइजेशन के अनेक विकल्प भी मौजूद हैं। यह एप ईपब, पीडीएफ और अडोब डीआरएम इनक्रिप्टेड फाइल्स को सपोर्ट करता है। आप इसमें अपनी ई-बुक्स की लायब्रेरी बना सकते हैं।
नूक
नूक भी पाठकों का पसंदीदा एप है। इस एप में भी ई-पब और पीडीएफ फाइल्स की सुविधा है। इसके निर्माता बार्न्स एण्ड नोबल के बुक-स्टोर में लाखों की सांख्या में पुस्तकें तो उपलब्ध हैं ही सैकड़ों पत्रिकाएं, अखबार और कॉमिक्स इस एप के माध्यम से पढ़ी जा सकती हैं।
वाटपैड
वाटपैड एक ऐसा एप है जिस पर पाठकों के समूह एक दूसरे से सम्पर्क करने के साथ ही लेखकों से भी सम्पर्क साध सकते हैं और उनके साथ वार्तालाप कर सकते हैं। एक बार आपकी पसंद जान लेने के बाद ये एप आपके पसंद की पुस्तकों के बारे में जानकारी भी देता है। इस एप का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि आप पाठकों के लिए अपनी कहानी / आलेख शेयर कर सकते हैं।
प्रतिलिपि
भारतीय भाषाओं की पुस्तकें पढ़ने के लिए यह सबसे सशक्त एप है। इस एप पर अपनी कहानियाँ, कविताएँ या अन्य आलेख स्वयं प्रकाशित भी कर सकते हैं। अपनी पसंदीदा पुस्तकों की लायब्रेरी बना सकते हैं। वर्तमान में इस एप की मदद से हिन्दी सहित १२ भारतीय भाषाओं- बंगाली, मराठी, उर्दू, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, उड़िया व पंजाबी, की पुस्तकों का रसास्वादन कर सकते हैं।
 

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स्टोरी मिरर
प्रतिलिपि की ही भारतीय भाषाओं की पुस्तकें पढ़ने के लिए यह एक अन्य महत्वपूर्ण एप है। इस एप पर भी विभिन्न विषयों की रचनाएँ पढ़ने के साथ ही अपनी कहानियाँ, कविताएँ, कलाकृतियाँ या अन्य आलेख स्वयं प्रकाशित कर सकते हैं। यह एप हिन्दी सहित 10 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है।
नाट नल 
स्टोरी मिरर की ही तरह एक युवा भारतीय इंजीनियर द्वारा निर्मित यह एप भारतीय भाषाओं की पुस्तकें और पत्रिकाएँ पढ़ने के लिए पाठको के मध्य तेजी से अपनी पहिचान बनाने में सफल हुआ है। इस एप की सबसे खास बात यह है कि इसके सदस्य बनकर हिन्दी की सभी प्रमुख पत्रिकाएँ- मसलन हंस, ज्ञानोदय, कथादेश, वागर्थ, पाखी, कथाक्रम, अट्टहास, व्यंग्ययात्रा, बनासजन, ककसाड़, चाणक्यवार्ता आदि पढ़ सकते हैं और उन्हें ऑफलाइन पढ़ने के लिए डाउनलोड भी कर सकते हैं। इस एप पर भारतीय लेखकों की कृतियाँ बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। इस एप की एक अन्य विशेषता यह भी है कि इस पर कन्नड़, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं के साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं- अवधी, भोजपुरी और मैथिली की पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। मेरा कहानी संग्रह ‘भास्कर राव इंजीनियर’ भी पढ़ने के लिए इस एप पर उपलब्ध है।
इनके अतिरिक्त भी बहुत से ई-रीडर एप आज उपलब्ध हैं जिनमें से कुछ प्रमुख हैं- गुडरीड्स, ऊडीज ईबुक रीडर, कोबो और गूगल प्ले बुक्स। इन सभी एप को एण्ड्रायड सपोर्ट करता है।
 
पढ़ने के शौकीनों के लिए आज बड़ी संख्या में ई-पत्रिकाएँ भी उपलब्ध हैं और अनेक ऐसी साइट्स मौजूद हैं जिन पर स्तरीय साहित्यिक कृतियों अथवा प्रतिष्ठित साहित्यकारों की रचनाओं को पढ़ा जा सकता है। कविता कोष (www.kavitakosh.org), गद्यकोष (gadyakosh.org), अनुभूति (www.anubhuti-hindi.org), अभिव्यक्ति (www.abhivyakti-hindi.org) व हिन्दी समय (www.hindisamay.com) ऐसी ही वेब साइट्स हैं जिनपर सभी प्रमुख भारतीय लेखकों की प्रतिनिधि रचनाएँ पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं। प्रमुख ई-पत्रिकाओं में रचनाकार (www.rachanakar.org), साहित्यकुंज (www.sahityakunj.net), सृजनगाथा (www.srijangatha.com) साहित्यशिल्पी (www.sahityashilpi.com), साहित्यसुधा, स्वर्गविभा (www.swargvibha.tk), लघुकथा (www.laghukatha.com), साहित्यमंजरी (www.sahityamanjari.com) व हस्ताक्षर (http://hastaksher.com) के नाम हैं जो नियमित रूप से रचनाओं का प्रकाशन करते हैं।
यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि उक्त एप्स और वेबसाइट्स के अतिरिक्त भी ऐसे अनेक आनलाइन प्लेटफार्म उपलब्ध हैं जहाँ लाखों की संख्या में ई-पुस्तकें उपलब्ध हैं और फ्री डाउनलोड की सुविधा देते हैं। इनमें प्रमुख हैं डिजीलायब्रेरीज (www.digilibraries.com), गेटफ़्रीबुक्स (www.getfreeebooks.com), ओपनलायब्रेरी (http://openlibrary.org), मैनीबुक्स (www.manybooks.net), माइपुस्तक (https://mypustak.com) आदि। माइपुस्तक पर आप पुस्तकें डोनेट कर सकते हैं। यह शैक्षणिक विषयों की पुस्तकों के लिए कार्य करने वाला एक प्रमुख भारतीय पोर्टल है।
किताबों की दुनिया में इस तकनीकी क्रांति की बदौलत पढ़ने और ज्ञानार्जन के नए-नए आयाम खुल गए हैं। कुछ क्लिक से आपकी पहुँच समूची दुनिया के साहित्य जगत तक हो गई है। नए लेखकों की पुस्तकों से लेकर दुर्लभ पुस्तकें तक इस प्लेटफार्म पर उपलब्ध हो रही हैं। पुस्तक प्रकाशन के साथ ही उनके ई-बुक संस्करण भी उपलब्ध कराए जाने लगे हैं। यह पुस्तक प्रेमियों के लिए सर्वथा अनूठा संसार है जिसमें बैठकर वह अपनी रुचि के अनुसार पुस्तक का चयन कर अपनी ज्ञान-पिपासा को शांत कर सकता है।
-अरुण अर्णव खरे