चीन की आर्थिक गड़बड़ी का सबूत: चीन की 1.4 बिलियन डॉलर की कंपनी मात्र 1000 डॉलर में बिकने को तैयार है

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चीन: अगर कोई 1.4 बिलियन डॉलर की कंपनी मात्र 1000 डॉलर में बिकने को तैयार हो जाए तो इसे क्या कहेंगे? बिजनेस का डूबना या दिवालियापन? आज यही हाल चीन की अर्थव्यवस्था में कई बड़ी कंपनियों का हो चुका है। एक समय में विश्व के भीतर अपने नाम का डंका बजाने वाली चीनी कंपनी Renrenche की कीमत एक समय में 1.4 बिलियन थी, अब उसे लगभग 1000 डॉलर में बिकने के लिए तैयार होना पड़ रहा है। Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार Renrenche कई निवेशकों जैसे Goldman Sachs Group Inc. और Tencent Holdings द्वारा समर्थित चीन की सबसे हॉट टेक यूनिकॉर्न्स में से एक था, लेकिन अब यह कार वेबसाइट लगभग 1,000 डॉलर में खुद को बेच सकती है।

चीन पर पहले अमेरिका का ट्रेड वार और फिर कोरोना के बाद वैश्विक स्तर पर बहिष्कार ने चीन की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। अमेरिका ने जिस प्रकार चीन की कंपनियों, उसकी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया है और जिस प्रकार भारत-अमेरिका ने चीन के उभरते टेक सेक्टर पर करारा प्रहार किया है, उसके बाद चीन की इकॉनोमी गर्त में जाती दिखाई दे रही है। भारत और अमेरिका ने चीन को दुनिया के निवेशकों के लिए अछूत बना दिया है।

मीडिया  ने कई बार यह रिपोर्ट भी किया है कि चीन की अर्थव्यवस्था धरातल में जा रही है। चीन में बाढ़ जैसी मानव-निर्मित आपदाएं भी उसके कृषि सेक्टर को बड़ा नुकसान पहुंचा रही हैं। जब से कोरोना का कहर शुरू हुआ है तब से चीनी कंपनियों का लगातार बहिष्कार किया जा रही है। चीन के बहिष्कार का सबसे अधिक नुकसान टेक कंपनियों को हुआ जिसमें हुवावे का नाम सबसे ऊपर आता है। कोरोना के बाद इस दिग्गज कंपनी का बड़े स्तर पर विरोध होना शुरू हुआ था। हुवावे चीन की एक विश्वस्तरीय कंपनी थी और अब इस कंपनी के बैन होने से चीन विश्व के औद्योगिक ग्लोबल सप्लाई चेन से बाहर होने के कगार पर आ चुका है।

चीन के ऑनलाइन क्लास्सिफाइड ऐड दिग्गज Renrenche की हॉन्ग कॉन्ग इकाई को संभालेंगे। इस सौदे से कार ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म Renrenche को उबरने में मदद भी मिलेगी जो अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव के बीच वित्तपोषण की समस्याओं में तितर-बितर हो चुकी है।

2014 में स्थापित, Renrenche को Uxin Ltd. और Softbank Vision द्वारा फंडेड Guazi.com से कड़ी टक्कर मिलने लगी थी जिसके कारण इसकी फंडिंग समाप्त हो गयी थी। रिपोर्ट के अनुसार यह कंपनी 15 मिलियन डॉलर के ऋण में भी थी।

इस सौदे के पूरा होने के बाद चीन में इंटरनेट बूम के एक दशक बाद स्टार्टअप क्षेत्र में यह सभी बड़ी विफलताओं में से एक होगा। SCMP की जून में आई रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष पहली तिमाही में 460,000 से अधिक चीनी फर्में स्थायी रूप से बंद हुईं, जिनमें आधे से अधिक नए स्टार्ट अप्स थे। इन कंपनियों में से अधिकांश ऐसे क्षेत्र में स्थित थे जिन्हें चीन का आर्थिक केंद्र माना जाता था, जैसे कि दक्षिणी चीन में Guangdong प्रांत।

यही नहीं चीन के बैंक भी विफल हो रहे हैं क्योंकि देश कर्ज के साथ अपनी विकास दर बढ़ा रहा है और वर्षों के कर्ज ने बैंकों को खोखला बना दिया है। मार्च, 2020 तक, चीन का कुल घरेलू ऋण देश की जीडीपी का 317 प्रतिशत था। कोरोना ने इस कर्ज को भी बढ़ाने में और मदद की। चीन की बैंकिंग प्रणाली सरकार ही नियंत्रित करती है जिसके कारण यह इंडस्ट्री भ्रष्टाचार और महंगे ऋण से त्रस्त हो चुकी है।कर्ज का पैमाना इतना बड़ा है कि चीन ने कुछ कंपनियों को सार्वजनिक रूप से बंद होने दिया।

व्यापार की संख्या चीन की डूबती अर्थव्यवस्था के चुनौतियों को रेखांकित करती है। अब कोरोना के कारण चीन की सरकार के पास न तो अंतराष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को बचाने का कोई उपाए है और न ही  अपने देश के अंदर की डूबती कंपनियों को बचाने का कोई उपाए। चीनी कंपनियों को न तो विदेश से ऑर्डर आ रहे हैं और न ही उनके पास अपने लेबरों को देने का रुपया बचा है। अगर कोई कंपनी अपना पंजीकरण समाप्त भी करवाना चाह रही है तो उसे चीन के महंगे दिवालियापन के प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। अगर दिवालिया नहीं हो रहे हैं तो उन्हें अपनी कंपनी के हिस्सों को Renrenche की तरह अन्य कम्पनियों को बेचना पड़ रहा है। आज चीन की अर्थव्यवस्था ऐसी मंदी में है जहां से निकलना नामुमकिन तो नहीं लेकिन बेहद मुश्किल है। जियोपॉलिटिक्स में मात खा रहे चीन की आर्थिक शक्ति भी खोखली होती जा रही है और Renrenche उसका सबसे नया उदाहरण है।