खाप पंचायत का फरमान… विधवा भाभी से विवाह करना होगा, सुनते ही देवर ने कर ली आत्महत्या

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रामगढ़. झारखंड के रामगढ़ जिले में खाप पंचायत का एक अजीबोगरीब फरमान सामने आया है। यह फरमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गांव के निकट गोला पुलिस थानांतर्गत एक छोटे से गांव पूरबडीह का है।

पुलिस सूत्रों ने की मानें तो मृत युवक लव कुमार के पिता सुखलाल महतो ने बुधवार को  लिखित शिकायत में कहा है कि उनके  बड़े बेटे की पिछले वर्ष सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से पूरा परिवार सदमे में था। छोटा बेटा पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए तन्मयता से काम कर रहा था। विधवा भाभी को वह पूर्व के समान आदर देते रहा। इस बीच, किसी ने भाभी के साथ उसके अनैतिक संबंधों की हवा उड़ा दी।

एक बेटे की मौत से आहत परिवार पर यह बड़ा चोट था। भाभी से अवैध संबंध होने का आरोप लगाते हुए गांव में खाप पंचायत बैठी और उसे अपनी विधवा भाभी से ब्याह करने का अनैतिक हुक्म दिया गया।   इस अनैतिक संबंध के लिए वह तैयार नहीं हुआ और पूरबडीह गांव स्थित अपने मकान में मंगलवार की रात फांसी लगा ली।  गोला थाने के थानाध्यक्ष बीएन ओझा ने बताया कि परिवार की सूचना पर पुलिस दल गांव पहुंचा और युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। उन्होंने बताया कि मामले की जांच चल रही है। अभी इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया है।

खाप एक सामाजिक प्रशासन की पद्धति है, जो भारत के कई राज्यों में विस्थापित है।एक गोत्र या फिर बिरादरी के सभी गोत्र मिलकर खाप पंचायत बनाते हैं। खाप पंचायतें दरअसल प्राचीन समाज का वह रूढ़िवादी हिस्सा हैं, जो आधुनिक समाज और बदलती हुई विचारधारा से सामंजस्य नहीं बैठा पा रहा है। इसका जीता जागता प्रमाण पंचायतों के मौजूदा स्वरूप में देखा जा सकता है, जिसमें महिलाओं और युवाओं का प्रतिनिधित्व न के बराबर है।

आरोपी आए, न आए, खाप पंचायत में लिए गए फैसले को सर्वसम्मति से लिया गया फैसला बताया जाता है और ये सभी के पत्थर की लकीर मान ली जाती है। पिछले काफी समय से खाप पंचायतें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। यदि इन पंचायतों की मानसिकता और इनके सामाजिक ढांचों पर ध्यान दिया जाए, तो चौंका देने वाले आंकड़े सामने आते हैं, जो बेहद ही चिंताजनक हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इनके फैसले को अवैध बताते हुए कड़ी फटकार लगाई है।

खाप पंचायतों पर सख्त कार्रवाई नहीं करने के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी काफी तल्ख लहजे में चेताया है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर केंद्र सरकार खाप पंचायतों पर प्रतिबंध लगाने में सक्षम नहीं है तो अदालत को ही कदम उठाने होंगे।