कोविड-19 से लड़ने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकियों के संकलन का लोकार्पण

कोविड-19 से लड़ने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकियों के संकलन का लोकार्पण


कोविड-19 से लड़ने के लिए देश के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक दिन-रात काम कर रहे हैं। इस कवायद में कोविड-19 का सामना करने के लिए कई प्रभावी प्रौद्योगिकियां उभरकर सामने आ रही हैं। कोविड-19 से लड़ने के लिए विकसित भारतीय प्रौद्योगिकियों का एक संकलन नेशनल रिसर्च डिवेलपमेंट कारपोरेशन (एनआरडीसी) ने तैयार किया है। इस संकलन का लोकार्पण डॉ. शेखर सी. मांडे, महानिदेशक, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) व सचिव, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) ने किया है। 
 

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इस संकलन में कोविड-19 से जुडी 200 भारतीय प्रौद्योगिकियों, वर्तमान अनुसंधान गतिविधियों, व्यावसायीकरण के लिए उपलब्ध प्रौद्योगिकियों, भारत सरकार द्वारा की गई पहल और प्रयासों के बारे में जानकारियां शामिल है, जिनका वर्गीकरण कोविड-19 से संबंधिक ट्रैकिंग, टेस्टिंग और ट्रीटिंग रणनीति के अंतर्गत किया गया है। इनमें से अधिकांश प्रौद्योगिकियां परीक्षण की कसौटी पर खरी उतरी हैं और उत्पाद को तेजी से बाजार में प्रस्तुत करने में उद्यमियों को मदद कर सकती हैं क्योंकि उन्हें नवीन रूप में फिर से स्थापित करने की आवश्यकता नहीं है। 
 

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संकलन में पेश की गई प्रौद्योगिकियों में एक डिजिटल और आणविक निगरानी डेटाबेस, कोविड-19 रैपिड टेस्टिंग किट, कोविड-19 की निगरानी के लिए ट्रैकिंग मोबाइल एप्लिकेशन, रियल टाइम पीसीआर टेस्ट, रोगाणु-रोधी कपड़े, अस्पतालों को कीटाणु रहित करने के लिए माइनस कोरोना यूवी बॉट, बायो बॉडी सूट और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए हर्बल उत्पाद शामिल हैं। 
सीएसआईआर मुख्यालय, नई दिल्ली में इस संकलन का लोकार्पण करते हुए डॉ. शेखर सी. मांडे ने कोविड-19 से लड़ने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकियों का संकलन तैयार करने के लिए एनआरडीसी की पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि “यह संकलन समसामयिक है और इससे सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमियों, स्टार्टअप्स और व्यापक स्तर पर आम जनता को बड़े पैमाने पर लाभ होगा।” 
 

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डॉ. एच. पुरुषोत्तम, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनआरडीसी ने बताया कि “एनआरडीसी ने सभी हितधारकों के लाभ के लिए कोविड-19 से लड़ने के लिए सबसे प्रासंगिक और उभरते हुए स्वदेशी तकनीकी नवाचारों को संकलित करने का प्रयास किया है। यह संकलन नीति निर्माताओं, उद्योगों, उद्यमियों, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमियों, शोध छात्रों, वैज्ञानिकों और अन्य लोगों के लिए एक तैयार-संदर्भ के रूप में काम करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि संकलित कई प्रौद्योगिकियां भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद(आईसीएमआर) से मान्यता प्राप्त हैं। 
इस संकलन में प्रस्तुत जानकारियां भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड और अनेक शैक्षणिक संस्थानों जैसे- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन, स्टार्टअप इंडिया और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, श्री चित्रा तिरुनल आयुर्विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय विज्ञान संस्थानों आदि से प्राप्त की गई हैं। 
इंडिया साइंस वायर