उन्नाव में दलित लड़कियों की मौत पर खुलासा:पुलिस बोली- आरोपी ने प्यार से इनकार करने पर पानी में कीटनाशक मिलाकर एक को दिया, पर तीनों लड़कियों ने पी लिया

उन्नाव में दलित लड़कियों की मौत पर खुलासा:पुलिस बोली- आरोपी ने प्यार से इनकार करने पर पानी में कीटनाशक मिलाकर एक को दिया, पर तीनों लड़कियों ने पी लिया

बुधवार को उन्नाव जिले के बबुराहा टोला गांव में 13, 16 और 17 साल की तीन लड़कियां अपने खेत पर संदिग्ध हालत में बेहोश मिली थीं। इनमें से 2 की मौत हो गई।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में दलित लड़कियों की मौत की गुत्थी पुिलस ने सुलझा ली है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि एकतरफा प्यार के चलते ये घटना हुई है। एक आरोपी दलित लड़की को जानता था और उससे प्यार का इजहार किया था। प्यार से इनकार पर इस लड़के ने पानी की बोतल में कीटनाशक मिलाकर लड़की को पिला दिया। अनजाने में यही पानी बाकी दोनों लड़कियों ने पी लिया।

17 फरवरी को बबुरहा गांव में खेत में तीन लड़कियां संदिग्ध हालात में मिली थीं। उनके मुंह से झाग निकल रहा था। दो की मौत हो गई और एक का इलाज कानपुर में चल रहा है। उसकी हालत नाजुक है।

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बबुरहा गांव में घटना स्थल से फॉरेंसिक टीम ने पानी की बोतल और चिप्स के पैकेट जब्त किए थे। इन्हीं के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

मौके से मिली बोतल और चिप्स के पैकेट के जरिए आरोपी तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल से बोतल और चिप्स का पैकेट जब्त किया था। इसी के जरिए पुलिस आरोपी तक पहुंची। आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह बताया कि घटना के दिन दो युवकों को खेतों से भागते हुए देखा गया था। इसके बाद उनकी तलाश की गई और फिर इन युवकों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, इस केस में विनय ऊर्फ लंबू मुख्य आरोपी है। दूसरा आरोपी नाबालिग है।

विनय एक लड़की से प्यार करता था। उसने उस लड़की से मोबाइल नंबर मांगा था, पर लड़की ने इनकार कर दिया। इसके बाद विनय ने उसे मारने की साजिश रची थी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी बेहोशी की हालत में लड़की से संबंध बनाना चाहता था।

परिवार ने 18 घंटे बाद शिकायत दर्ज कराई थी

इस मामले में लड़कियों के परिवार ने 18 घंटे बाद पुलिस में शिकायत की थी। इस मामले में दुष्कर्म और ऑनर किलिंग का एंगल पर भी जांच की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पॉइजनिंग की पुष्टि हुई थी। हालांकि, किसी तरह की चोट या सैक्सुअल हैरेसमेंट के निशान नहीं मिले हैं।

इस घटना से गांव में काफी आक्रोश था। शुरुआत में पुलिस का रवैया भी गांव वालों के गुस्से की वजह बना। पुलिस रात में ही लड़कियों का अंतिम संस्कार करना चाहती थी, लेकिन ग्रामीणों और राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया। तब पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा।

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