इस साल बॉलीवुड मे इन उभरते हुए सितारों का जादू चला

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कोरोना संक्रमण और उसके चलते हुए लॉकडाउन का असर पूरी दुनिया में देखने को मिला तो बॉलीवुड इससे अछूता कैसे रहता.

फ़िल्मों और टीवी की दुनिया पर इसका ऐसा असर हुआ कि बड़ी-बड़ी फ़िल्मों की रिलीज़ स्थगित हो गई और बड़े से बड़ा सितारा भी घर बैठने को मज़बूर हो गया.

कुछ बड़े सितारों की फ़िल्में या फिर वेब सिरीज़ ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ज़रूर रिलीज़ हुई पर जो ख्याति बड़े पर्दे पर रिलीज़ हुई फ़िल्मों और फ़िल्मी सितारों को मिलती है, वो उन्हें नहीं मिली.

लेकिन इस दौरान ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कुछ सितारों की गाड़ी चल निकली और उन्होंने अपने काम से दर्शकों को ख़ासा प्रभावित किया.

लॉकडाउन के दौरान अपने अभिनय से लोगों को दिलों में उतरने वाले ऐसे कलाकारों पर एक नज़र-

करीब एक दशक से फ़िल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे जयदीप अहलावत ने “गैंग्स ऑफ़ वासेपुर” में शाहिद ख़ान के किरदार से थोड़ी लोकप्रियता हासिल की थी पर वो जल्द ही भुला दिए गए.

फ़िल्म इंडस्ट्री में उन्हें अच्छे अभिनेता का दर्जा दिया गया और उन्हें बड़ी बड़ी फ़िल्मों में बड़े बड़े सितारों के साथ छोटे मोटे रोल मिलने लगे.

साल की शुरुआत में जब ओटीटी पर क्राइम थ्रिलर सीरीज़ “पाताल लोक” रिलीज़ हुई तो उन्हें अपने करियर में एक नया मोड़ मिल गया. उनके किरदार हाथी राम चौधरी को दर्शकों ने सर आँखों पर बिठाया.

कॉस्टिंग डायरेक्टर से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत करने वाले अभिषेक बनर्जी ने कई फ़िल्मों में बहुत छोटे छोटे क़िरदार किए. बतौर अभिनेता उन्हें प्रसिद्धि मिली 2018 में आई फ़िल्म “स्त्री” जिसमें “जाना” के क़िरदार ने लोगों को बहुत गुदगुदाया.

कॉमेडी किरदारों में बंधे अभिषेक बनर्जी को इस साल आए “पाताल लोक” के खूंखार हथौड़ा त्यागी के किरदार ने उनकी कॉमेडी इमेज को तोड़ उन्हें गंभीर अभिनेता की श्रेणी में दाल दिया.

हथौड़ा त्यागी के किरदार के बाद अभिषेक जल्द ही मिर्ज़ापुर 2 सीरीज़ में भी नज़र आएंगे.

गुज़रे वक़्त के सुपरस्टार धर्मेंद्र के दूसरे बेटे बॉबी देओल ने साल 1995 में “बरसात” फ़िल्म से अपनी फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत की.

उनके करियर में सोल्जर और गुप्त जैसी हिट फिल्में भी शामिल हैं लेकिन बाद में उनका करियर ढलान पर आने लगा. और वे दो हीरो वाली फ़िल्मों में ज़्यादा नज़र आने लगे. जैसे-जैसे वक़्त बीतता गया उन्हें काम मिलना बहुत कम हो गया. काम की कमी की वजह से करीबन पांच साल वो फ़िल्मों से दूर रहे.

बड़े भाई सनी देओल ने 2017 में फ़िल्म “पोस्टर बॉयज” से बॉबी देओल का करियर पुर्नजीवित करने की कोशिश की. भाई सनी देओल के बाद सलमान खान ने बॉबी देओल का हाथ थामते हुए उन्हें रेस 3 का हिस्सा बनाया पर फ़िल्म असफल रही.

पिछले साल अक्षय कुमार के साथ बॉबी देओल हॉउसफुल-4 में नज़र आए. फ़िल्म ने कमाई की पर बॉबी देओल अपने अभिनय की कोई छाप नहीं छोड़ पाए.

2020 में बॉबी देओल की ओटीटी पर एक फ़िल्म “क्लॉस ऑफ़ 83” और प्रकाश झा की सीरीज़ “आश्रम” रिलीज़ हुई. वास्तविक घटनाओं से प्रेरित आश्रम सीरीज़ में बॉबी देओल ने पहली बार नकारत्मक किरदार निभाते हुए एक ढोंगी गॉडमैन का क़िरदार निभाया. बॉबी देओल का ये बदला हुआ रंग दर्शको को बेहद पसंद आया और उनकी लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई. सिरीज़ की पॉपुलैरिटी को देखते हुए आश्रम का दूसरा सीजन ज़ल्द ही रिलीज़ होगा.

TVF पिक्चर, कोटा फैक्ट्री, परमानेंट रूममेट्स जैसे सीरीज़ से ओटीटी प्लेटफॉर्म में अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले जितेन्द्र कुमार साल की शुरुआत में आयुष्मान खुराना के साथ समलैंगिक प्रेम पर आधारित कॉमेडी फ़िल्म “शुभ मंगल ज़्यादा सावधान” में नज़र आए.

उन्हें फ़िल्म में पसंद किया गया पर उनकी लोकप्रियता में बढ़ोतरी लॉक डाउन में ओटीटी पर रिलीज़ हुई उनकी सिरीज़ “पंचायत” से हुई जिसमे वो शहरी लड़के अभिषेक त्रिपाठी का किरदार निभाते हैं जो रोज़गार के लिए एक गांव पहुँच जाता है.

दर्शकों ने जितेन्द्र को इस किरदार में बहुत पसंद किया. पंचायत में नीना गुप्ता और रघुबीर यादव भी अहम किरदार में नज़र आए. इस सिरीज़ ने दर्शकों को बहुत गुदगुदाया और जितेन्द्र कुमार को स्टार बनाया.

2017 में तृप्ति डिमरी ने बॉबी देओल की फ़िल्म “पोस्टर बॉयज” से अपनी फ़िल्मी शुरुआत की पर फ़िल्म नहीं चली. 2018 में इम्तियाज़ अली के भाई साजिद अली की फ़िल्म “लैला मजनूं” में वो नज़र आई.

उनके अभिनय को फ़िल्म समीक्षकों से काफ़ी वाहवाही मिली और फ़िल्म को एकता कपूर का समर्थन भी मिला पर स्टार फैक्टर की कमी के कारण फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर कमाल नहीं कर पाई.

ओटीटी पर इस साल लैला मजनू की जोड़ी तृप्ति डिमरी और अविनाश तिवारी एक बार फिर “बुलबुल” फ़िल्म में नज़र आई. “बुलबुल” फ़िल्म 1800 के बंगाल को दर्शाती हुई नारीवाद का सन्देश देती है.

दर्शकों को देवी और चुड़ैल दर्शाती तृप्ति डिमरी का दमदार अभिनय काफ़ी पसंद आया.

‘मसान’ फ़िल्म से अपनी मौजूदगी दर्ज़ करवाने वाली श्वेता त्रिपाठी ने अपने पांच साल के फ़िल्मी करियर में फ़िल्म और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर काफ़ी काम किया है.

इस लॉकडाउन के दौर में उनकी दो फ़िल्म रिलीज़ हुई है जिसमें नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ “रात अकेली है” और विक्रांत मैस्सी के साथ उनकी स्पेस फ़िल्म “कार्गो”. दोनों फ़िल्मों में उनके काम की तारीफ़ें हुईं.

इसी दौरान उनकी लॉकडाउन एक्सपेरिमेंटल सेरिएस “गॉन गेम” भी रिलीज़ हुई. 2018 में ओटीटी पर रिलीज़ हुई सीरीज़ मिर्ज़ापुर को लोगों ने बहुत पसंद किया और इसके फैन बेसब्री से सीजन दो का इंतज़ार कर रहे थे.

श्वेता त्रिपाठी के गोलू गुप्ता का किरदार भी लोगों बेहद पसंद. जल्द ही मिर्ज़ापुर 2 रिलीज़ होगी जिसमे श्वेता त्रिपाठी का किरदार बन्दूक के साथ नज़र आएगा.

इश्वाक सिंह

थिएटर में काम कर रहे इश्वाक सिंह ने कई बड़ी फ़िल्मों में छोटे मोटे किरदार किए जिसमें शामिल है रांझणा, अलीगढ़, वीरे दी वेडिंग, तुम बिन 2, मलाल पर इन फ़िल्मों में बतौर अभिनेता वो नज़र अंदाज़ हुए.

जहाँ “पाताल लोक” सिरीज़ में कई अभिनेताओं का दमदार अभिनय नज़र आया वही इमरान अंसारी के क़िरदार ने इश्वाक सिंह को रातों रात युवा दिलों की धड़कन बना दिया.

उनके किरदार को बेहद पसंद किया गया और सोशल मीडिया पर उनकी फ़ैन में भारी बढ़ोतरी भी हुई. इस नई प्रसिद्धि को इश्वाक सिंह बहुत ही ज़िम्मेदारी के साथ अपना रहे हैं और भविष्य में अच्छे काम से इसे बरक़रार रखना चाहते हैं.

दो दशक से बंगाल फ़िल्म इंडस्ट्री में काम कर रही स्वस्तिक मुख़र्जी का कहना है की जो मान्यता उन्हें इस साल उनके अभिनय के लिए मिली वो उन्हें पहले कभी नहीं मिली.

वो इस साल सीरीज़ “पाताल लोक” में अहम किरदार निभाते हुए नज़र आईं. सुशांत सिंह राजपूत की आख़िरी फ़िल्म “दिल बेचारा” में भी उनकी भूमिका शानदार रही.

बतौर अभिनेत्री इस नई प्रसिद्धि से स्वस्तिक मुख़र्जी बहुत खुश है और वो चाहती हैं कि जल्द ही कोरोना से बेहाल माहौल ठीक हो ताकि वो मुंबई आकर और काम कर सकें.

बीते दो दशक से हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ा और पंजाबी फ़िल्मों में काम कर चुके सोनू सूद अक्सर विलेन या साइड एक्टर के रूप में बड़ी बड़ी फ़िल्मों में नज़र आते रहे है. लॉकडाउन के दौरान उनकी कोई फ़िल्म या सिरीज़ तो रिलीज़ नहीं हुई पर उनके दरियादिली की झलक लोगों को देखने को ख़ूब मिली.

उन्होंने कई प्रवासी कामगार को कई शहरों से ख़ास बस, ट्रेन और फ्लाइट के द्वारा उनके घर भेजा. उनकी कोशिशों को सराहनीय बताते हुए आम लोगों ने उन्हें रील नहीं रियल लाइफ़ हीरो का दर्जा दिया.

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