आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक कोरोना संक्रमण के खिलाफ आएगी काम

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भारत समेत दुनिया के कई देश कोरोना वायरस कोविड-19 की वैक्सीन खोजने की रेस में जुटे हैं। जैसे-जैसे कोरोना महामारी दुनिया भर में अपने पैर पसार रही है इसकी वैक्सीन बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले एक्सपर्ट एक साथ आ रहे हैं। वैज्ञानिक, शोधकर्ता और दवा बनाने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग एक्सपर्ट के साथ मिल कर इस चुनौती को कम से कम समय में पूरी करने की कोशिश में लगे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पहले के दौर में कोई नई वैक्सीन या दवा बनने में सालों का वक्त लगता था। योगेश शर्मा न्यूयॉर्क में हेल्थकेयर इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग में बतौर सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर काम करते हैं।वो कहते हैं कि जानवरों पर वैक्सीन का ट्रायल शुरू करने से पहले रसायनों के अलग-अलग कॉम्बिनेशन बनाने और उनके मॉलिक्यूलर डिज़ाइन बनाने में ही सालों का वक्त लग जाता था। 

लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से इस काम को सालों की बजाय अब कुछ दिनों में ही पूरा कर लिया जाता है। वो कहते हैं, “मशीन लर्निंग के साथ रसायनों के सिन्थेसिस का काम करने पर वैज्ञानिक अब एक साल का काम एक सप्ताह में हासिल कर लेते हैं। ब्रिटेन में मौजूद आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप कंपनी पोस्टऐरा कोरोना वायरस से निपटने के लिए दवा के खोज के काम में जुटी है। केमिस्ट्रीवर्ल्ड के अनुसार के अनुसार, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कंपनी दवा बनाने के लिए नए रास्ते तलाश रही है। नोवल कोरोना वायरस को हराने के लिए ये कंपनी अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिद्म के ज़रिए दुनिया भर के दवाई बनाने वालों की जानकारी एक साथ लेकर आ रही है।”महामारी के दौर में ये बात सूकून देने वाली है कि जल्द से जल्द कोरोना की दवा बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी काम में लाया जा रहा है। वायरस को फैलने के लिए रोकने के लिए शुरूआती महीनों में भारत में स्वैब टेस्ट को अधिक प्राथमिकता दी गई. इस टेस्ट के नतीजे आने में दो से पांच दिन का वक्त लग सकता है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें की नतीजे आने में होने वाली देरी के कारण भारत में कोरोना वायरस अधिक तेज़ी से फैला। हालांकि ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सोल्यूशन्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीयूष सोमानी कहते हैं कि एक्सरे और सीटी स्कैन के ज़रिए पांच मिनट में इसका पता लगाया जा सकता है।वो कहते हैं, “एए प्लस कोविड-19 टेस्टिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित है। ये टेस्टिंग आपको पांच मिनट के भीतर बता सकता है कि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या नहीं। लक्षण वाले और बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों की टेस्टिंग में सरकारी अस्पतालों में इस अलग और सस्ते रेपिड डिटेक्शन टेस्टिंग सोल्यूशन की सफलता की दर क़रीब 98 फीसदी है। जिन मामलों में व्यक्ति को फेफ़ड़ों से जुड़ी अन्य समस्याएं है उनमें इस तरीके से कोविड-19 संक्रमण टेस्टिंग की सफलता दर करीब 87 फीसदी है।”

भारत समेत दुनिया के कई देश कोरोना वायरस कोविड-19 की वैक्सीन खोजने की रेस में जुटे हैं। जैसे-जैसे कोरोना महामारी दुनिया भर में अपने पैर पसार रही है इसकी वैक्सीन बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले एक्सपर्ट एक साथ आ रहे हैं। वैज्ञानिक, शोधकर्ता और दवा बनाने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग एक्सपर्ट के साथ मिल कर इस चुनौती को कम से कम समय में पूरी करने की कोशिश में लगे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पहले के दौर में कोई नई वैक्सीन या दवा बनने में सालों का वक्त लगता था। योगेश शर्मा न्यूयॉर्क में हेल्थकेयर इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग में बतौर सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर काम करते हैं।वो कहते हैं कि जानवरों पर वैक्सीन का ट्रायल शुरू करने से पहले रसायनों के अलग-अलग कॉम्बिनेशन बनाने और उनके मॉलिक्यूलर डिज़ाइन बनाने में ही सालों का वक्त लग जाता था। 

लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से इस काम को सालों की बजाय अब कुछ दिनों में ही पूरा कर लिया जाता है। वो कहते हैं, “मशीन लर्निंग के साथ रसायनों के सिन्थेसिस का काम करने पर वैज्ञानिक अब एक साल का काम एक सप्ताह में हासिल कर लेते हैं। ब्रिटेन में मौजूद आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप कंपनी पोस्टऐरा कोरोना वायरस से निपटने के लिए दवा के खोज के काम में जुटी है। केमिस्ट्रीवर्ल्ड के अनुसार के अनुसार, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कंपनी दवा बनाने के लिए नए रास्ते तलाश रही है। नोवल कोरोना वायरस को हराने के लिए ये कंपनी अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिद्म के ज़रिए दुनिया भर के दवाई बनाने वालों की जानकारी एक साथ लेकर आ रही है।”महामारी के दौर में ये बात सूकून देने वाली है कि जल्द से जल्द कोरोना की दवा बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी काम में लाया जा रहा है। वायरस को फैलने के लिए रोकने के लिए शुरूआती महीनों में भारत में स्वैब टेस्ट को अधिक प्राथमिकता दी गई. इस टेस्ट के नतीजे आने में दो से पांच दिन का वक्त लग सकता है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें की नतीजे आने में होने वाली देरी के कारण भारत में कोरोना वायरस अधिक तेज़ी से फैला। हालांकि ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सोल्यूशन्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीयूष सोमानी कहते हैं कि एक्सरे और सीटी स्कैन के ज़रिए पांच मिनट में इसका पता लगाया जा सकता है।वो कहते हैं, “एए प्लस कोविड-19 टेस्टिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित है। ये टेस्टिंग आपको पांच मिनट के भीतर बता सकता है कि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या नहीं। लक्षण वाले और बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों की टेस्टिंग में सरकारी अस्पतालों में इस अलग और सस्ते रेपिड डिटेक्शन टेस्टिंग सोल्यूशन की सफलता की दर क़रीब 98 फीसदी है। जिन मामलों में व्यक्ति को फेफ़ड़ों से जुड़ी अन्य समस्याएं है उनमें इस तरीके से कोविड-19 संक्रमण टेस्टिंग की सफलता दर करीब 87 फीसदी है।”